रांची में पुलिस मुख्यालय ने झारखंड में अवैध अफीम की खेती और उससे जुड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान की रणनीति तैयार की है। प्रस्तावित कार्रवाई में केवल खेतों में लगी फसल नष्ट करने तक सीमित रहने के बजाय खेती कराने वालों, आर्थिक मदद देने वालों, परिवहन से जुड़े लोगों और बड़े खरीदारों तक पहुंचने पर जोर रहेगा।
पुलिस के अनुसार, अभियान को तीन स्तरों में बांटा गया है। पहले स्तर पर जमीन मालिकों, खेती करने वालों और इसके लिए धन या बीज उपलब्ध कराने वाले लोगों की पहचान की जाएगी। अवैध बीज मिलने पर उसे नियमानुसार नष्ट करने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
दूसरे स्तर पर खेतों से अफीम बाहर ले जाने वाले रास्तों, वाहनों और तस्करी से जुड़े लोगों की पड़ताल होगी। बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली आपूर्ति कड़ियों के संबंध में संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने की योजना है।
तीसरे स्तर में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सक्रिय बताए जा रहे बड़े खरीदारों तथा नेटवर्क संचालकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। पुराने एनडीपीएस मामलों, गिरफ्तार आरोपियों से हुई पूछताछ, मोबाइल संपर्क, वित्तीय लेनदेन और आपूर्ति शृंखला से मिली सूचनाओं का विश्लेषण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
पुलिस प्रवक्ता एवं आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के मुताबिक, खूंटी, चतरा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम को प्राथमिकता वाले जिलों में रखा गया है। इन जिलों में पहले अफीम की खेती वाले गांवों और जमीनों की सूची तैयार की जा रही है। थाना स्तर पर स्थानीय पुलिस, चौकीदार और ग्रामीण सूचना तंत्र की मदद से संभावित क्षेत्रों की पहचान होगी।
नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान निगरानी तथा खुफिया सूचनाएं जुटाने की योजना है, ताकि फसल तैयार होने से पहले ही खेत तैयार करने या बीज बोने की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। पुलिस और वन विभाग के संयुक्त अभियान के साथ सैटेलाइट तथा ड्रोन से निगरानी की भी तैयारी है। बीट गार्ड और स्थानीय वनकर्मियों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी जाएगी।