बोकारो के लोहांचल क्षेत्र की रजनी शर्मा ने विदेश की नौकरी छोड़कर स्वरोजगार की राह अपनाई है। अब वह चास-बोकारो की महिलाओं और युवतियों को घर में तैयार सामान के लिए बाजार खोजने तथा व्यवसाय आगे बढ़ाने में मदद कर रही हैं। उनकी पहल का केंद्र स्थानीय स्तर पर बने खाद्य पदार्थों और हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री बढ़ाना है।
एमबीए की पढ़ाई के बाद रजनी ने दिल्ली, हैदराबाद और अमेरिका में नौकरी की थी। लगातार स्थानांतरण से बेटी की पढ़ाई प्रभावित होने के कारण उन्होंने उसका दाखिला बोकारो के एक विद्यालय में कराया। इसके बाद नौकरी छोड़कर वह लोहांचल कॉलोनी लौट आईं और नवाचार तथा उद्यमिता के क्षेत्र में काम शुरू किया।
रजनी ने आम पापड़, बेल कैंडी और आंवला कैंडी तैयार करने की शुरुआत की। उन्होंने आसपास की पांच महिलाओं और युवतियों को भी इस काम से जोड़ा। स्थानीय बाजार से आम, बेल और आंवला खरीदा जाता है, जबकि हींग, हर्रे और अजवाइन राजस्थान से मंगाई जाती है। तैयार उत्पादों की पैकिंग भी समूह के सहयोग से की जाती है।
उत्पाद तैयार होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उनकी बिक्री थी। इसके लिए रजनी ने बोकारो के साथ धनबाद, फुसरो, देवघर और जमशेदपुर के व्यवसायियों से संपर्क किया। उन्होंने विपणन के काम में दो लोगों को भी लगाया। इस व्यवस्था से उत्पादों की बिक्री होने लगी और निर्माण तथा विपणन से जुड़े लोगों के लिए आमदनी का रास्ता बना।
स्थानीय महिला उद्यमियों को साझा मंच देने के लिए रजनी ने महिला उद्यमी हाट की शुरुआत की। सिटी सेंटर सेक्टर चार में आयोजित हाट में महिलाओं ने खाद्य पदार्थों के अलावा सजावटी और घरेलू उपयोग की वस्तुएं प्रदर्शित कीं। वहां उत्पादों की बिक्री भी की गई। इस पहल में कई स्थानीय महिला उद्यमी शामिल हुईं।
रजनी का कहना है कि चास-बोकारो की कई महिलाएं घरों में उपयोगी और कलात्मक वस्तुएं बनाती हैं, लेकिन उनके उत्पाद बाजार तक नहीं पहुंच पाते। इसी अंतर को कम करने के लिए महिला उद्यमी हाट नियमित रूप से लगाने की योजना है। इसका उद्देश्य महिलाओं को अपने हुनर और व्यवसाय के प्रदर्शन के लिए स्थानीय मंच उपलब्ध कराना है।