आदित्यपुर में सीआईआई सेफ्टी टॉक: उद्योगों से सुरक्षा मानकों और दुर्घटना रिपोर्टिंग पर गंभीरता की अपील

दो दिवसीय सेफ्टी टॉक के उद्घाटन सत्र में बड़ी कंपनियों से एमएसएमई को प्रशिक्षण और आधुनिक सुरक्षा तकनीक अपनाने में सहयोग देने पर जोर दिया गया।

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आदित्यपुर में आयोजित सीआईआई सेफ्टी टॉक सम्मेलन का उद्घाटन सत्र

आदित्यपुर में आयोजित दो दिवसीय सेफ्टी टॉक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षा नियमों के पालन और घटनाओं की सही रिपोर्टिंग पर जोर दिया गया। सीआईआई के झारखंड चैप्टर की ओर से होटल क्रूज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल ने कहा कि कंपनियों को कार्यस्थल की सुरक्षा के प्रति गंभीर और संवेदनशील रहना होगा।

राजीव मंगल ने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए वहां जानलेवा औद्योगिक दुर्घटनाओं के मामलों में कंपनी मालिक, ठेकेदार और प्रबंधक तक की जवाबदेही तय किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में वैसी सख्ती भले नहीं हो, लेकिन उद्योगों को दुर्घटना रोकने के लिए सामूहिक रूप से काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, एक जानलेवा हादसा उत्पादन और उत्पादकता से जुड़े प्रयासों पर भी सवाल खड़ा कर देता है।

सम्मेलन में बड़ी कंपनियों और एमएसएमई के बीच सुरक्षा संबंधी सहयोग की जरूरत भी रखी गई। मंगल ने कहा कि सीमित संसाधनों और कम निवेश क्षमता के कारण छोटी कंपनियां प्रशिक्षण तथा आधुनिक सुरक्षा उपकरणों पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पातीं। ऐसे में बड़े उद्योगों को उन्हें साथ लेकर चलने और जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

टाटा स्टील की अलग-अलग इकाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लॉस्ट टाइम इंजरी फ्रीक्वेंसी रेट में पहले की तुलना में कमी आई है। हालांकि, जानलेवा दुर्घटनाओं का औसत अपेक्षित स्तर तक नहीं घटना चिंता का विषय है। कुछ डिवीजन में दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं होने की समस्या भी सामने आई है, जबकि कुछ इकाइयों में 15 वर्षों से जानलेवा दुर्घटना या लॉस्ट टाइम इंजरी दर्ज नहीं हुई है।

उन्होंने प्रत्येक दुर्घटना के बाद कारणों की समीक्षा को जरूरी बताया। उनके अनुसार, कई घटनाएं स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन नहीं किए जाने से होती हैं। जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर कर्मचारियों को आवाज उठानी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां कर्मचारी असुरक्षित परिस्थितियों में काम से इनकार करते हैं और भारी वाहनों में दुर्घटना की आशंका पहचानने वाले सेंसर भी लगाए जाते हैं।

सम्मेलन के संदेश का केंद्र कार्यस्थल पर सतत सतर्कता और साझा जिम्मेदारी रहा। कर्मचारियों से असुरक्षित स्थिति में काम नहीं करने तथा कमियों की जानकारी सामने लाने की अपील की गई। वक्ताओं के अनुसार, नियमों के नियमित पालन, घटना की पारदर्शी रिपोर्टिंग और तकनीकी उपायों के संयुक्त इस्तेमाल से औद्योगिक दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।