उलिहातु में अधूरे आवास, बंद पेंशन और पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण

भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु में ग्रामीणों ने आवास, वृद्धावस्था पेंशन, आंगनबाड़ी भवन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।

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खूंटी के उलिहातु गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति

खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड स्थित भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु में कई परिवार अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। झारखंड स्थापना दिवस की तैयारियों के बीच गांव में अधूरे आवास, बंद वृद्धावस्था पेंशन, आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन का अभाव और पेयजल की समस्या सामने आई है।

गांव के निवासी सिमोन का कहना है कि सरकारी आवास योजना के तहत स्वीकृत राशि का केवल आधा हिस्सा मिलने के कारण उनका मकान पूरा नहीं हो सका। उन्होंने शेष रकम को लेकर ठेकेदार पर आरोप लगाया है। फिलहाल उन्हें पुराने मिट्टी के मकान की छत बांस के सहारे तैयार करनी पड़ रही है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

उलिहातु के 83 वर्षीय याकूब मुंडा आज भी खेती के लिए लकड़ी का हल बनाते हैं। उनके अनुसार, पहले वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी, लेकिन तीन वर्षों से भुगतान बंद है। उन्होंने शिकायत की कि अधिकारी और नेता गांव में आते हैं, बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं, मगर स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाता।

आंगनबाड़ी केंद्र के पास भी अपना भवन नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों से केंद्र का संचालन सेविका के निजी मकान में किया जा रहा है। भवन निर्माण के लिए कई बार आवेदन दिए जाने के बावजूद अभी तक अलग परिसर उपलब्ध नहीं हो पाया है। गांव में कराई गई बोरिंग से पानी नहीं मिलने की शिकायत भी ग्रामीणों ने रखी है।

खूंटी जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि मिश्रा ने कहा कि उलिहातु में पहले कई विकास कार्य हुए हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी काफी काम बाकी है। उनके मुताबिक सड़क और आंगनबाड़ी भवन की योजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं और इनके क्रियान्वयन की तैयारी है। वहीं मुरहू के उप प्रमुख अरुण साबू ने योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचने का आरोप लगाया।

ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों के बयानों से उलिहातु में स्वीकृत योजनाओं की जमीनी प्रगति, पेंशन भुगतान तथा पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत सामने आती है। गांव के लोगों की मुख्य अपेक्षा है कि अधूरे काम पूरे हों और स्थापना दिवस के आयोजनों के साथ रोजमर्रा की सुविधाओं पर भी ठोस कार्रवाई दिखाई दे।