रांची में कृषि विभाग ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़े किसानों के राशन कार्ड को लेकर सभी जिलों के उपायुक्तों को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी किसान का एफपीओ में निदेशक या बोर्ड सदस्य होना मात्र राशन कार्ड अथवा दूसरी कल्याणकारी योजनाओं से उसका लाभ समाप्त करने का आधार नहीं बन सकता।
कृषि सचिव अबुबक्कर सिद्दीख ने उपायुक्तों को भेजे पत्र में संबंधित पदाधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है। पात्रता की जांच खाद्य सुरक्षा से जुड़े वास्तविक नियमों और तय मानकों के अनुसार करने पर जोर दिया गया है। केवल कंपनी निदेशक के रूप में दर्ज होने के कारण किसान को अपात्र नहीं माना जाना चाहिए।
यह निर्देश राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली के डेटाबेस में गड़बड़ियों की पहचान के लिए चल रही प्रक्रिया के बीच आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एफपीओ के बोर्ड में शामिल कुछ किसानों को नोटिस भेजे जा रहे थे। राशन कार्ड समाप्त होने की आशंका के कारण कई किसान निदेशक पद छोड़ने पर विचार कर रहे थे।
कृषि विभाग का कहना है कि एफपीओ छोटे और सीमांत किसानों को संगठित करने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। इनके माध्यम से किसानों को कृषि तकनीक, खाद-बीज और बेहतर बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने का प्रयास होता है। बोर्ड में शामिल अधिकतर सदस्य स्थानीय किसान होते हैं और खेती-किसानी से सीधे जुड़े रहते हैं।
राज्य में 550 एफपीओ होने की जानकारी दी गई है। करीब एक दर्जन संगठनों ने कृषि विभाग के समक्ष राशन कार्ड से नाम हटाए जाने की शिकायत रखी है। बोकारो जिले के जरीडीह और कसमार प्रखंडों में स्थित एफपीओ से जुड़े निदेशकों के नाम भी इसी आधार पर हटाए जाने के मामले सामने आए हैं।
विभाग ने सत्यापन और डेटा शुद्धीकरण के दौरान छोटे एवं सीमांत किसानों के वैध अधिकारों की रक्षा करने को कहा है। नए निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच व्यक्तिगत पात्रता के आधार पर हो और किसी संगठन में पदनाम को अपने आप सरकारी लाभ से वंचित करने का कारण न बनाया जाए।