रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बुधवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में प्रदर्शन किया। पार्टी के कार्यकर्ता रांची कॉलेज मैदान में एकत्र हुए और वहां से लोक भवन की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शन में रांची के साथ खूंटी, रामगढ़ और लोहरदगा से आए कार्यकर्ता तथा नेता भी शामिल हुए।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में नारे लगाए। लोक भवन के पास पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया। कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग हटाने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर तैनात सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं नारेबाजी करते रहे।
झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी का आंदोलन केवल सड़क तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। उनके अनुसार, इस विषय पर इंडिया गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी कर रहा है और उसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शामिल होने की संभावना है।
भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में गठबंधन संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में आगे की प्रक्रिया पर विचार करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संबंधी उनकी मांग पार्टी का राजनीतिक आरोप और रुख है; रिपोर्ट में इसके समर्थन में किसी न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।
राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इससे आम लोगों को अपने नागरिक होने का प्रमाण देने में परेशानी हो रही है। उन्होंने मतदाता सूची से बाहर रह गए लोगों के भविष्य को लेकर चिंता जताई और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी। झामुमो ने एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया रद्द करने की मांग भी रखी है।
विधायक विकास मुंडा और अमित महतो ने भी प्रदर्शन के दौरान एसआईआर का विरोध किया। मुंडा ने प्रक्रिया के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया, जबकि महतो ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। ये सभी दावे झामुमो नेताओं के हैं। चुनाव आयोग का पक्ष है कि आयोग के भीतर अलग-अलग मत उसकी आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।