रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन के म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा कि राजस्व अधिकारी आवेदकों से ऑनलाइन आवेदन जमा करने पर जोर दे सकते हैं। अदालत के अनुसार, यह व्यवस्था बिहार टेनेंट्स होल्डिंग्स (मेंटेनेंस ऑफ रिकॉर्ड्स) एक्ट, 1973 की धारा 11 का उल्लंघन नहीं करती।
मामला जमशेदपुर निवासी मदन मोहन प्रसाद की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने मानगो के वार्ड संख्या 10 में खाता संख्या 427 और प्लॉट संख्या 2160 की 2.40 हेक्टेयर जमीन का म्यूटेशन अपने नाम करने की मांग की थी। संबंधित अंचल अधिकारी ने उनका ऑफलाइन आवेदन इस आधार पर स्वीकार नहीं किया कि उसे ऑनलाइन दाखिल नहीं किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 1973 के कानून की धारा 11 में निर्धारित प्रपत्र में आवेदन देने का प्रावधान है, लेकिन ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं है। राज्य सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है तथा अवैध रसीद जारी करने पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
अदालत ने कहा कि कानून बनते समय डिजिटल व्यवस्था की कल्पना नहीं की गई थी, लेकिन आज आवेदन प्रक्रिया को केवल भौतिक माध्यम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण फाइलों की आवाजाही में होने वाली देरी घटाने और भौतिक अभिलेखों में हेरफेर की आशंका कम करने में सहायक है।
हाईकोर्ट ने इसके साथ डिजिटल सुविधाओं से वंचित लोगों की कठिनाइयों पर भी ध्यान दिया। अदालत ने माना कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे आवेदक पंचायत सुविधा केंद्र, प्रज्ञा केंद्र, मोबाइल ई-सेवा केंद्र या विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरा लीगल वालंटियर से सहायता ले सकते हैं।
अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए मदन मोहन प्रसाद को ऑनलाइन आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया। परेशानी होने पर उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता लेने को कहा गया। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित अधिकारी को उस पर निर्णय लेकर आवेदक को सूचित करना होगा।