ओबीसी अधिकारों की मांग पर 6 अक्टूबर को गुमला बंद और चक्का जाम का आह्वान

केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने गुमला में मशाल जुलूस निकालकर 6 अक्टूबर को बंद और चक्का जाम तथा 7 अक्टूबर को सांकेतिक धरने की घोषणा की है।

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गुमला में ओबीसी अधिकारों की मांग को लेकर निकाला गया मशाल जुलूस

गुमला में ओबीसी अधिकारों से जुड़ी मांगों को लेकर केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति, झारखंड ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। समिति के आह्वान पर सोमवार देर शाम शहर में मशाल जुलूस निकाला गया। इसके बाद 6 अक्टूबर को गुमला बंद और चक्का जाम करने तथा अगले दिन जिला मुख्यालय में सांकेतिक धरना देने की जानकारी दी गई।

मशाल जुलूस में शामिल लोग सिसई रोड, पालकोट रोड और जशपुर रोड से गुजरते हुए टावर चौक पहुंचे। यहां आयोजित सभा में समिति के प्रतिनिधियों ने लोगों से प्रस्तावित बंद और चक्का जाम में शामिल होने की अपील की। आयोजकों के अनुसार, जुलूस में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

सभा में समिति से जुड़े दिलीप नाथ साहू ने आंदोलन की मांगों को अधिकार और सामाजिक न्याय से संबंधित बताया। उन्होंने जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम रखने की मांग उठाई। उनका कहना था कि अलग कॉलम से पिछड़े वर्ग की आबादी का आंकड़ा सामने आएगा और उसके आधार पर नीतियां तैयार करने में सहायता मिल सकेगी।

समिति ने कहा है कि मांगों पर गंभीर पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 7 अक्टूबर को होने वाले सांकेतिक धरने के बाद उपायुक्त के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपने की योजना है।

आयोजकों ने बंद को शांतिपूर्ण रखने की अपील की है। समिति की ओर से आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखने की बात भी कही गई है। हालांकि बंद और चक्का जाम के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर उपलब्ध विवरण में प्रशासन की ओर से कोई अलग सूचना नहीं दी गई है।

समिति के अनुसार, यह कार्यक्रम केवल गुमला तक सीमित नहीं है। इसी आंदोलन के तहत सिमडेगा, खूंटी, रांची और लोहरदगा में भी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। गुमला में मशाल जुलूस के बाद अब आंदोलन का अगला घोषित चरण जिला बंद, चक्का जाम और सांकेतिक धरना है।