काठीकुंड में बाल संरक्षण समितियों का प्रशिक्षण, पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर जोर

दुमका के काठीकुंड में आयोजित प्रखंड स्तरीय कार्यशाला में बाल सुरक्षा कानूनों, दुर्व्यवहार की पहचान और मिशन वात्सल्य की योजनाओं की जानकारी दी गई।

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काठीकुंड में बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की प्रशिक्षण कार्यशाला

दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड सभागार में मंगलवार को बाल संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से बैठक सह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रखंड प्रशासन और स्वयंसेवी संस्था सीनी के संयुक्त आयोजन में प्रखंड तथा पंचायत स्तर की बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

कार्यशाला में पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उनके दायित्वों को प्रमुखता से समझाया गया। प्रतिभागियों को महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के संकल्प और मिशन वात्सल्य की मार्गदर्शिका के अनुरूप पंचायत स्तरीय समितियों की संरचना, कामकाज और जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई।

सीनी के जिला समन्वयक चंदन झा ने पंचायत स्तर पर बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के गठन और प्रभावी संचालन पर जोर दिया। उन्होंने बाल संरक्षण से संबंधित कार्यों में संस्था की ओर से हरसंभव सहयोग दिए जाने का आश्वासन भी दिया।

प्रशिक्षण के दौरान पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत यौन अपराधों की श्रेणियों, दंड के प्रावधानों और अनिवार्य रिपोर्टिंग के महत्व पर चर्चा हुई। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के अंतर्गत देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका भी बताई गई।

प्रतिभागियों को बाल दुर्व्यवहार के संकेत पहचानने, सुरक्षित और असुरक्षित पलायन के बीच अंतर समझने तथा बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने की जानकारी दी गई। मिशन वात्सल्य के तहत स्पॉन्सरशिप, फोस्टर केयर और आफ्टर केयर योजनाओं की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया पर भी मार्गदर्शन दिया गया।

कार्यशाला में बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिकाओं से भी अवगत कराया गया। इसमें पंचायत सचिव, मुखिया, समेकित बाल विकास परियोजना के कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, महिला पर्यवेक्षिकाएं, सीनी के कार्यकर्ता और अन्य संबंधित हितधारक शामिल हुए।