केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह शुरू, परिसर में लगे करीब 200 पौधे

रांची स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में 1 से 7 नवंबर तक चलने वाले ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह की शुरुआत योग, स्वास्थ्य परिचर्चा, कहानी सत्र और पौधरोपण से हुई।

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रांची में केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड ने रविवार को ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह-2026 की शुरुआत की। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिकारियों ने भाग लिया। सप्ताह का उद्देश्य स्वस्थ दिनचर्या और पर्यावरण के अनुकूल जीवन पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

यह आयोजन भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत किया जा रहा है। एक से सात नवंबर तक चलने वाले सप्ताह को मिशन लाइफ से जोड़ा गया है। उद्घाटन दिवस पर योग सत्र, स्वास्थ्य एवं कल्याण विषय पर परिचर्चा, कहानी सुनाने का सत्र और पौधरोपण अभियान आयोजित किए गए।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर में करीब 200 पौधे लगाए गए। पौधरोपण में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। गतिविधि के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, हरित परिसर के निर्माण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।

स्वास्थ्य एवं कल्याण पर हुई परिचर्चा में स्वस्थ जीवनशैली को रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाने और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने पर जोर दिया गया। योग सत्र में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया गया। आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया।

कहानी सुनाने के सत्र में प्रथम सेमेस्टर की छात्रा प्रियंका कुमारी ने प्रस्तुति दी। इस गतिविधि को विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता और सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शामिल किया गया था। कार्यक्रम में अतुल प्रकाश, निशांत कुमार और आशीष कुमार शर्मा सहित करीब 100 विद्यार्थियों की भागीदारी रही।

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर बैरागी मलिक, मेडिकल सेंटर के यादवेंद्र कुमार यादव, सहायक रजिस्ट्रार केडी तिवारी, एस्टेट ऑफिसर प्रोफेसर भगवान सिंह, इंजीनियर मुकेश कुमार और शंभुराज उपाध्याय सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सप्ताह के पहले दिन की गतिविधियों में स्वास्थ्य, रचनात्मक अभिव्यक्ति और पर्यावरण संरक्षण को एक साझा पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।