खरसावां के पदमपुर-तेलीसाही में आयोजित होने वाली काली पूजा और सात दिवसीय मेले को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य और स्वच्छता की रूपरेखा तय की है। खरसावां थाना परिसर में बुधवार को बीडीओ प्रधान माझी की अध्यक्षता में हुई शांति समिति की बैठक में संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए जरूरी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि आठ नवंबर की रात मां काली की पूजा-अर्चना होगी। प्रतिमा का विसर्जन 14 नवंबर को दोपहर तीन बजे किया जाएगा। इस अवधि में पदमपुर और तेलीसाही गांवों में सात दिनों तक मेला लगेगा। आयोजन में आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई गई है।
मंदिर में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई जाएंगी। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल तैनात रहेगा। अन्य पुलिसकर्मियों के साथ सादे कपड़ों में भी जवान मौजूद रहेंगे। मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने और प्रशासन के संपर्क नंबर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।
भीड़ और वाहनों को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश द्वार पर ड्रॉप गेट बनाया जाएगा। गांव के भीतर वाहनों का प्रवेश रोका जाएगा और बड़े वाहनों को मेला क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं होगी। झूला संचालकों को अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था रखने के लिए कहा गया है। मेला क्षेत्र में पर्याप्त रोशनी तथा खराब चापाकलों की मरम्मत की व्यवस्था भी की जाएगी।
श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्र सातों दिन चौबीस घंटे खुला रहेगा। थाना प्रभारी राहुल कुमार सिंह ने कहा कि मेले के दौरान शराब की बिक्री, जुआ खेलने या विधि-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। शांति समिति के सदस्यों से आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने में सक्रिय सहयोग मांगा गया है।
मेला परिसर में विभिन्न प्रकार के झूले और दुकानें लगाई जाएंगी। ओड़िया तथा हो भाषा के नाटकों के मंचन की भी तैयारी है। स्थानीय परंपरा के अनुसार पदमपुर-तेलीसाही में काली पूजा की शुरुआत 1897 में हुई थी। प्रशासन और आयोजन समिति ने इसी पुरानी परंपरा तथा अपेक्षित भीड़ को देखते हुए पहले से व्यवस्थाएं बनाने का निर्णय लिया है।