खलारी के विश्रामपुर में भू-धंसान, सीसीएल ने पुनर्वास और मुआवजे पर की चर्चा

विश्रामपुर के जेहलीटांड़ में एक घर के पास भू-धंसान के बाद सीसीएल की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। प्रभावित परिवार को क्वार्टर में स्थानांतरित करने और मुआवजे की बाधाएं दूर करने पर बातचीत हुई।

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खलारी के विश्रामपुर में भू-धंसान स्थल का निरीक्षण करती सीसीएल की प्रबंधन टीम

रांची जिले के खलारी स्थित विश्रामपुर मौजा के जेहलीटांड़ में एक घर के पास भू-धंसान होने के बाद सीसीएल के एनके एरिया की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। महाप्रबंधक अमिताभ कुमार तिवारी के नेतृत्व में पहुंचे अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों, रैयतों और विस्थापित प्रतिनिधियों से सुरक्षा तथा पुनर्वास से जुड़े विषयों पर बातचीत की।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, भू-धंसान से बने गड्ढे को केडीएच परियोजना पदाधिकारी बिमल कुमार की देखरेख में डोजर मशीन से भरवाया गया। यह स्थान दुलार गंझू के घर के निकट है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र की स्थिति देखी और परिवार की सुरक्षा के लिए तत्काल उपलब्ध विकल्प पर चर्चा की।

सीसीएल प्रबंधन ने दुलार गंझू के पुत्र दामोदर गंझू को परिवार के साथ कंपनी के क्वार्टर में स्थानांतरित होने का प्रस्ताव दिया। दामोदर गंझू ने क्वार्टर में जाने से पहले मुआवजे का भुगतान करने की मांग रखी। बैठक में मुआवजे की प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए जल्द जिला कलेक्टर से मिलने का निर्णय लिया गया।

बैठक का दूसरा प्रमुख विषय केडीएच खदान का विस्तारीकरण और उससे जुड़ी विस्थापन प्रक्रिया रही। प्रबंधन ने कोल इंडिया के नियमों का उल्लेख करते हुए रैयतों से विस्तारीकरण में सहयोग मांगा। बैठक में शामिल रैयतों और विस्थापित प्रतिनिधियों ने भी प्रक्रिया में सहयोग देने का भरोसा जताया।

विश्रामपुर पंचायत में अधिग्रहित भूमि से जुड़े दस्तावेजों और रैयतों की जमीन की भौतिक जांच तेज करने पर भी सहमति बनी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केडीएच खदान के विस्तार के लिए विश्रामपुर और करकट्टा मौजा की भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है। संबंधित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

हालांकि, अधिग्रहित क्षेत्र खाली कराने में कई व्यावहारिक अड़चनें सामने आ रही हैं। रैयती भूमि के अलावा गैरमजरुआ और वनभूमि पर बने घरों के मुआवजे का विषय भी प्रक्रिया से जुड़ा है। घटनास्थल के निरीक्षण और बैठक के बाद अब प्रभावित परिवार की सुरक्षित शिफ्टिंग, मुआवजा भुगतान तथा भूमि अभिलेखों की जांच पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।