गढ़वा में कम और असंतुलित बारिश का खेती पर असर, धान की रोपाई 87.98 प्रतिशत तक सीमित

गढ़वा में खरीफ की कई फसलें निर्धारित लक्ष्य से पीछे रह गई हैं। मक्का और अरहर की बुवाई लक्ष्य के करीब है, लेकिन मडुआ का रकबा 13.24 प्रतिशत तक ही पहुंच सका।

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गढ़वा जिले में कम और असंतुलित बारिश का असर खरीफ खेती पर पड़ा है। कृषि विभाग के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में धान की रोपाई 87.98 प्रतिशत क्षेत्र में ही हो सकी। बारिश की कमी से खेतों में समय पर पर्याप्त नमी नहीं बनने के कारण धान के साथ मोटे अनाज और कुछ दलहनी फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई है।

जिले में धान की खेती के लिए 56,400 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इसके मुकाबले 87.98 प्रतिशत क्षेत्र में रोपाई हुई। सबसे कमजोर स्थिति मडुआ की रही। मडुआ के लिए तय 3,400 हेक्टेयर लक्ष्य का केवल 13.24 प्रतिशत हिस्सा ही खेती के दायरे में आ सका।

मक्का और अरहर की बुवाई अपेक्षाकृत बेहतर रही है। मक्का के 27,650 हेक्टेयर लक्ष्य की तुलना में 97.25 प्रतिशत तथा अरहर के 29 हजार हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 96.17 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई। मूंगफली और तिल भी क्रमशः 96.46 और 96.83 प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंच गए।

दूसरी ओर, उरद की बुवाई 10 हजार हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 60.50 प्रतिशत रही। मूंग के लिए निर्धारित 1,500 हेक्टेयर क्षेत्र में से केवल 45.33 प्रतिशत में बुवाई हो सकी। ज्वार और बाजरा की प्रगति भी अपने-अपने लक्ष्य के 50 प्रतिशत तक सीमित रही।

बारिश के मासिक आंकड़ों में भी बड़ा उतार-चढ़ाव दर्ज हुआ। जून में सामान्य 138.8 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 15.6 मिलीमीटर बारिश हुई। जुलाई में भी सामान्य 362.4 मिलीमीटर की जगह 212.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। हालांकि अगस्त में बारिश सामान्य 278.2 मिलीमीटर से अधिक होकर 372.5 मिलीमीटर रही।

सितंबर में अब तक 165.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पूरे महीने का सामान्य स्तर 203.4 मिलीमीटर है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने पर कई किसानों को फसल बचाने के लिए सिंचाई का सहारा लेना पड़ा, जिससे खेती की लागत बढ़ी। अब शेष सितंबर की बारिश पर नजर है; आगे भी कमी रहने पर खरीफ उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।