गढ़वा में रोग निगरानी के लिए बनेगी वन हेल्थ समिति, 90 दिनों की कार्ययोजना मंजूर

गढ़वा में संक्रामक और पशुजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए वन हेल्थ समिति और संयुक्त रोग नियंत्रण दल गठित किए जाएंगे। चार विशेष दल अलग-अलग रोगों की निगरानी करेंगे।

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गढ़वा में रोग नियंत्रण की 90 दिवसीय कार्ययोजना पर बैठक करते अधिकारी

गढ़वा जिले में संक्रामक और पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों की समय पर पहचान तथा रोकथाम के लिए वन हेल्थ समिति और जिला संयुक्त रोग नियंत्रण दल गठित किए जाएंगे। उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सोमवार को समाहरणालय में हुई बैठक में इस व्यवस्था के लिए 90 दिनों की कार्ययोजना को मंजूरी दी।

बैठक में वन हेल्थ की अवधारणा के तहत मनुष्य, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य की संयुक्त निगरानी पर जोर दिया गया। नई व्यवस्था में रेबीज, डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस और एंथ्रेक्स के साथ दूषित भोजन या पानी से होने वाली बीमारियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।

जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार मिश्रा के अनुसार, वर्ष 2026 में जिले में विभिन्न बीमारियों के 12 प्रकोप दर्ज किए गए। इनमें 80 लोग प्रभावित हुए और तीन लोगों की मौत हुई। जिले में कुत्तों के काटने की 1,620 घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। इसे देखते हुए रेबीज से बचाव, टीकाकरण और उपचार पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया।

रोग निगरानी के लिए चार विशेष दल बनाए जाएंगे। पहला दल दूषित भोजन और पानी से होने वाली बीमारियों पर काम करेगा। दूसरा दल मलेरिया व डेंगू, तीसरा खसरा, पोलियो व डिप्थीरिया और चौथा दल रेबीज तथा अन्य पशुजनित बीमारियों की निगरानी करेगा।

इन दलों में स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि, वन, पेयजल और खाद्य सुरक्षा विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्ययोजना के पहले चरण में समितियों और दलों का गठन कर विभागीय जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। दूसरे चरण में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा, जबकि तीसरे चरण में संयुक्त क्षेत्रीय अभ्यास के माध्यम से तैयारियों की समीक्षा होगी।

उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और किसी बीमारी की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम, अंशुमान राजहंस और सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कैनेडी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।