गढ़वा जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ग्रामीण संपर्क मार्गों और मुख्य सड़कों के जोड़ बिंदुओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने उन स्थानों को चिह्नित करने का निर्देश दिया है, जहां ग्रामीण सड़कें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग या पथ प्रमंडल की सड़कों से मिलती हैं। संबंधित विभागों से इन बिंदुओं का स्थलवार निरीक्षण करने को कहा गया है।
ग्रामीण सड़क से मुख्य मार्ग पर पहुंचते ही वाहनों की गति और यातायात का स्वरूप बदल जाता है। ऐसे में चेतावनी तथा गति नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है। निर्देश के अनुसार, निरीक्षण के बाद जरूरत वाले स्थानों पर स्पीड ब्रेकर, रंबल स्ट्रिप, रेडियम संकेतक और सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
इस अभियान में मुख्य सड़कों के आसपास स्थित विद्यालयों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। स्कूल खुलने और छुट्टी के समय बच्चों की आवाजाही के बीच तेज रफ्तार वाहन जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे विद्यालयों की पहचान कर उनके आसपास चेतावनी बोर्ड, गति अवरोधक, रंबल स्ट्रिप और रेडियम संकेतक लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
सुरक्षा संबंधी निरीक्षण केवल उन जगहों तक सीमित नहीं रहेगा, जहां पहले दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। सड़क की बनावट, तीखे मोड़, तेज रफ्तार, कम दृश्यता या ग्रामीण संपर्क मार्ग के कारण जिन स्थानों पर हादसे की आशंका बनी रहती है, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। वहां आवश्यक उपाय स्थल की स्थिति और निरीक्षण में सामने आई जरूरत के आधार पर तय होंगे।
गढ़वा में ग्रामीण सड़कों का बड़ा नेटवर्क मुख्य मार्गों से जुड़ा है और इन रास्तों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग तथा वाहन आवागमन करते हैं। नई कवायद के तहत इन मिलन बिंदुओं को भी औपचारिक सड़क सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाने पर जोर दिया गया है। संकेतक और गति नियंत्रण के उपाय वाहन चालकों को मुख्य सड़क पर पहुंचने से पहले सतर्क करने में सहायक हो सकते हैं।
जिला प्रशासन का जोर दुर्घटना होने के बाद की कार्रवाई के साथ संभावित जोखिम वाले स्थानों पर पहले से बचाव व्यवस्था तैयार करने पर है। विभागीय निरीक्षण और स्थानों की पहचान पूरी होने के बाद जरूरत के अनुरूप सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाने हैं। स्कूलों तथा ग्रामीण संपर्क मार्गों पर केंद्रित यह पहल जिले में सड़क सुरक्षा के लिए निवारक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।