गढ़वा में 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण पूरा, स्वरोजगार पर जोर

गढ़वा में 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार एसपी ने प्रतिभागियों से स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनने की बात कही।

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गढ़वा में बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन की सांकेतिक तस्वीर

गढ़वा में बकरी पालन से जुड़े 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम में स्वरोजगार को आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रतिभागियों को इस कौशल का व्यावहारिक लाभ लेने पर जोर दिया गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रशिक्षण पूरा होने के मौके पर एसपी ने कहा कि स्वरोजगार के माध्यम से लोग आत्मनिर्भर बन सकते हैं। यह संदेश खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो स्थानीय स्तर पर आजीविका के टिकाऊ विकल्प तलाश रहे हैं।

बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा ऐसा कार्य है जिसमें छोटे स्तर से शुरुआत की जा सकती है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह प्रशिक्षण इसी उद्देश्य से आयोजित किया गया कि प्रतिभागी पशुपालन से संबंधित बुनियादी समझ हासिल कर सकें और उसे आय के साधन में बदलने की दिशा में आगे बढ़ें।

समापन के दौरान दिया गया संदेश केवल प्रशिक्षण पूरा होने की औपचारिक जानकारी तक सीमित नहीं रहा। इसमें यह बात भी सामने आई कि कौशल आधारित काम लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर दे सकता है। गढ़वा जैसे जिले में ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता इसी संदर्भ में देखी जाती है।

फिलहाल उपलब्ध विवरण में प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों की संख्या या आगे की योजना का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस रिपोर्ट में केवल उन्हीं तथ्यों को रखा जा रहा है जो प्रकाशित शीर्षक और विवरण में स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।

कुल मिलाकर, गढ़वा में 12 दिन चले बकरी पालन प्रशिक्षण के पूरा होने को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम से जुड़ा मुख्य संदेश यही रहा कि स्थानीय कौशल को आय के अवसर में बदला जा सकता है।