गिरिडीह के सिरसिया स्थित श्री कबीर ज्ञान मंदिर में सोमवार को सद्गुरु मां का जन्मोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। आयोजन की शुरुआत सद्गुरु मां ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इसके बाद बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर पूजन-वंदन किया।
हरितालिका तीज के अवसर पर मंदिर परिसर में सद्गुरु कबीर साहब के साखी ग्रंथ का पाठ किया गया। श्रद्धालुओं ने सद्गुरु मां की उपस्थिति में आयोजित यज्ञ-हवन में भी भाग लिया। दिनभर चले कार्यक्रमों के कारण परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।
अपराह्न सत्र में तत्क्षण भाव-अभिव्यक्ति प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने भजनों में निहित भावों को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से व्यक्त किया। छोटे बच्चों ने भी अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। बच्चियों ने भावनृत्य किया, जबकि जन्मोत्सव की स्मृति में डांडिया नृत्य की प्रस्तुति भी हुई।
कार्यक्रम के दौरान दो नाटकों का मंचन किया गया। ‘मनुस्मृति में नारी’ शीर्षक प्रस्तुति के माध्यम से प्रचलित धारणाओं और व्याख्याओं पर निर्भर रहने के बजाय ग्रंथ का स्वयं अध्ययन करने का संदेश दिया गया। ‘गुरु मां का बचपन’ नाटक में सद्गुरु मां के जीवन से जुड़े संघर्षों को मंच पर प्रस्तुत किया गया।
अपने संबोधन में सद्गुरु मां ने जीवन में भक्ति, वैराग्य और समता अपनाने की बात कही। उन्होंने सुख और दुख के बीच मन की शांति बनाए रखने के लिए समता को आवश्यक बताया। रोजमर्रा के काम करते हुए ईश्वर का स्मरण करने, अभिमान छोड़ने तथा अपने जीवन को स्वयं और दूसरों की भलाई में लगाने का संदेश भी दिया।
जन्मोत्सव में झारखंड के साथ बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु पहुंचे। विभिन्न आश्रमों तथा मठों से आए संतों ने भी आयोजन में भाग लिया। पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, प्रतियोगिता, नृत्य और नाट्य मंचन ने कार्यक्रम को भक्ति तथा संस्कृति से जुड़े विविध आयोजनों का स्वरूप दिया।