गिरिडीह जिले में सरकारी अनाज की डोर स्टेप डिलीवरी से जुड़े टेंडर में जमा वाहन सूची को लेकर सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट में कुछ संवेदकों की सूची में मालवाहक वाहनों के साथ दोपहिया वाहन का नंबर दर्ज होने की बात सामने आने के बाद पूर्व विधायक और अन्य राजनीतिक नेताओं ने मामले की जांच की मांग की है।
बगोदर के पूर्व विधायक और भाकपा माले नेता विनोद कुमार सिंह ने कहा कि यदि गलत वाहन का विवरण देकर निविदा हासिल की गई है तो संबंधित संवेदक के साथ टेंडर पर निर्णय लेने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। उन्होंने निविदा के समय दी जाने वाली लंबी वाहन सूची और अनाज ढुलाई में वास्तव में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के बीच अंतर पर भी सवाल उठाया।
ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता राजेश यादव ने इसे गंभीर मामला बताते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में निविदा लेने वालों के साथ उसे निष्पादित करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। ये मांगें नेताओं के बयान हैं; टेंडर में अनियमितता का अंतिम निर्धारण किसी आधिकारिक जांच से ही होगा।
यह निविदा प्रखंड स्तर के सरकारी गोदामों से राशन डीलरों तक अनाज पहुंचाने की व्यवस्था से संबंधित है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष हुए टेंडर में बेंगाबाद सहित अन्य प्रखंडों के संवेदकों ने वाहनों की सूची विभाग को सौंपी थी। बाद में सूची की पड़ताल के दौरान कुछ प्रविष्टियों में दोपहिया वाहन के नंबर होने का दावा किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित वाहन विवरण के बारे में जिला परिवहन कार्यालय से जानकारी ली गई और बेंगाबाद के संवेदक का पक्ष भी जानने का प्रयास किया गया। हालांकि उपलब्ध विवरण में किसी विभागीय जांच, प्राथमिकी या अधिकारी के विरुद्ध औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।
मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अनाज परिवहन से जुड़ा होने के कारण वाहन सत्यापन और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित हुआ है। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि विभाग वाहन सूची की जांच कराएगा या नहीं और कथित विसंगतियों पर आगे कौन-सी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।