गिरिडीह के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना पर संकट की स्थिति बताई गई है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार चावल और राशि के अभाव में एमडीएम ठप होने की कगार पर है। यह मामला सीधे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से जुड़ा है, इसलिए इसे जिले के लिए अहम सार्वजनिक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस स्थिति से करीब 2.5 लाख बच्चों पर असर पड़ सकता है। सरकारी स्कूलों में एमडीएम बच्चों के नियमित भोजन और स्कूल उपस्थिति से जुड़ी व्यवस्था है। ऐसे में चावल और राशि की कमी का संकेत स्कूल स्तर पर रोजमर्रा के संचालन के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में संकट का कारण चावल और राशि का अभाव बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि व्यवस्था ठप होने की कगार पर है, यानी समस्या तत्काल ध्यान मांगती है। हालांकि उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि कितने स्कूलों में भोजन पूरी तरह बंद हुआ है या कहां-कहां आपूर्ति प्रभावित है।
जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह मुद्दा केवल प्रशासनिक आपूर्ति तक सीमित नहीं रहता। भोजन व्यवस्था प्रभावित होने पर बच्चों और अभिभावकों पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए तथ्यात्मक स्थिति, उपलब्ध चावल और लंबित राशि को लेकर स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
इस मामले में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि चावल और राशि की कमी कब तक दूर होती है। अभी प्रकाशित विवरण के आधार पर इतना स्पष्ट है कि गिरिडीह में एमडीएम व्यवस्था दबाव में है और करीब 2.5 लाख बच्चों से जुड़ी इस समस्या पर शीघ्र ध्यान देने की जरूरत है।