गोड्डा में फॉर्म-7 पर विवाद के बीच निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट की आवेदन प्रक्रिया

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि अधिकृत बीएलए निर्धारित सीमा और घोषणा पत्र के साथ फॉर्म-7 जमा कर सकते हैं। आवेदनों पर सत्यापन के बाद सक्षम अधिकारी निर्णय लेंगे।

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गोड्डा में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर निर्वाचन कार्यालय का स्पष्टीकरण

रांची/गोड्डा: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान गोड्डा समेत कुछ जिलों में फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए जाने की शिकायतों के बीच मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने प्रक्रिया स्पष्ट की है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि निर्धारित नियमों के तहत बीएलए-2 एक से अधिक आवेदन जमा कर सकते हैं और बीएलओ को उन्हें स्वीकार करना होगा।

अधिकारी के अनुसार, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अधिकृत बूथ लेवल एजेंट मतदाता सूची से जुड़े आवेदन सामूहिक रूप से संबंधित बूथ लेवल अधिकारी को दे सकते हैं। आवेदन स्वीकार होने का अर्थ नाम हटाने या किसी अन्य दावे पर तत्काल निर्णय होना नहीं है। प्रत्येक प्रपत्र की जांच और सत्यापन के बाद निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के स्तर से फैसला किया जाएगा।

निर्वाचन कार्यालय ने आवेदन जमा करने की दैनिक सीमा भी बताई है। प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले एक बीएलए प्रतिदिन अधिकतम 50 प्रपत्र दे सकता था। राज्य में प्रारूप सूची का प्रकाशन हो चुका है, इसलिए अब अधिकृत बीएलए एक दिन में अधिकतम 10 आवेदन संबंधित बीएलओ को सौंप सकता है।

सामूहिक आवेदन के साथ प्रपत्रों की सूची और लिखित घोषणा देना अनिवार्य होगा। घोषणा में बीएलए को प्रमाणित करना होगा कि उसने आवेदनों में दर्ज विवरण का व्यक्तिगत रूप से सत्यापन किया है और उपलब्ध जानकारी की शुद्धता से संतुष्ट है। इसमें एजेंट का पूरा नाम, राजनीतिक दल, तारीख और हस्ताक्षर भी दर्ज किए जाएंगे।

निर्देशों के मुताबिक, यदि कोई बीएलए पुनरीक्षण की पूरी अवधि में 30 से अधिक आवेदन जमा करता है, तो संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी या सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी को उनका व्यक्तिगत क्रॉस-वेरिफिकेशन करना होगा। निर्वाचन कार्यालय ने इस व्यवस्था का उद्देश्य सामूहिक आवेदनों की शुद्धता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखना बताया है।

गोड्डा के पूर्व विधायक अमित मंडल ने कहा कि बीएलए-2 के माध्यम से फॉर्म-7 जमा करना निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है और बीएलओ को आवेदन आगे की कार्रवाई के लिए भेजना चाहिए। उन्होंने फॉर्म जलाए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट को भ्रामक बताया। यह उनका पक्ष है; किसी आवेदन की सत्यता और उस पर अंतिम निर्णय निर्धारित जांच के बाद ही सक्षम निर्वाचन अधिकारी करेंगे।