लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड स्थित किता अंबाटांड़ गांव में सड़क और स्थायी पुल नहीं होने से एक परिवार को शव घर तक पहुंचाने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद पार्वती देवी का शव एंबुलेंस से गांव ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते की खराब स्थिति के कारण वाहन आगे नहीं बढ़ सका।
एंबुलेंस फंसने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव को वाहन से उतारकर खटिया पर रखा। इसके बाद वे खटिया के सहारे शव लेकर नदी पार करने लगे। इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ से दो घंटे लगे। तब जाकर शव को परिवार के घर तक पहुंचाया जा सका।
गांव की मुखिया अनिता देवी के अनुसार, आजादी के बाद से किता अंबाटांड़ तक सड़क नहीं बन सकी है। गांव पहुंचने के लिए लोगों को दो नदियां पार करनी पड़ती हैं। एक नदी पर दो बार पुल बनाया गया, लेकिन दोनों बार बरसात के दौरान वह बह गया। दूसरी जगह अब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग की कमी केवल सामान्य आवागमन तक सीमित समस्या नहीं है। बरसात में बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी होती है। एंबुलेंस गांव तक नहीं आने पर मरीजों को खटिया या दूसरे उपलब्ध साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
मुखिया ने बताया कि सड़क और पुल की मांग को लेकर सांसद कालीचरण सिंह, विधायक प्रकाश राम तथा जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव को सड़क से जोड़ने और नदी पर टिकाऊ पुल बनवाने की मांग दोहराई है।