चंदवा के तीन गांवों में झामुमो ने एमएमडीआर संशोधन विधेयक पर चलाया जागरूकता अभियान

झामुमो कार्यकर्ताओं ने सांसग और सेरक पंचायत के तीन गांवों में बैठक कर एमएमडीआर संशोधन विधेयक के संभावित प्रभावों पर ग्रामीणों से संवाद किया।

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चंदवा में एमएमडीआर संशोधन विधेयक पर आयोजित जागरूकता बैठक में मौजूद कार्यकर्ता और ग्रामीण

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध में अपना जागरूकता अभियान शनिवार को भी जारी रखा। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसग पंचायत के सोस और बुल्हु तथा सेरक पंचायत के रूद गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक की। अभियान का केंद्र खनिज संपदा और जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकार रहे।

बैठकों में झामुमो नेताओं ने ग्रामीणों को विधेयक के प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों के बारे में अपनी पार्टी का पक्ष बताया। नेताओं ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक और खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। उन्होंने संशोधन विधेयक वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में राज्य के हितों और विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई।

झामुमो युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अंकित तिवारी ने कहा कि प्रस्तावित प्रावधान भविष्य में राज्य की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने मंईयां सम्मान योजना, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, कृषि ऋण माफी, अबुआ आवास, सर्वजन पेंशन और छात्रवृत्ति योजनाओं का उल्लेख किया। हालांकि बैठक में इन संभावित प्रभावों का कोई स्वतंत्र आकलन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी नहीं दी गई।

अभियान के दौरान मो. सरफराज ने ग्रामीणों से अपने अधिकारों, सम्मान और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संगठित रहने की अपील की। उन्होंने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की बात कही। कार्यक्रम पूरी तरह ग्रामीण बैठकों और जनसंवाद के रूप में आयोजित किया गया।

इन बैठकों में झामुमो प्रखंड सचिव रोबिन उरांव, राजेंद्र भगत, इसराफिल अंसारी, जाफिर अंसारी, सुनील गंझू, अख्तर अंसारी और सधन उरांव सहित पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। सोस, बुल्हु और रूद के ग्रामीणों ने भी अभियान में भाग लिया। उपलब्ध विवरण में किसी प्रशासनिक अधिकारी की भागीदारी या विधेयक पर सरकार की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।