चतरा के लरंगा सामेडीह में हाथियों का झुंड, चार घर और धान की फसल क्षतिग्रस्त

टंडवा प्रखंड के लरंगा सामेडीह गांव में 15 से 16 हाथियों के झुंड ने चार घरों, धान की फसल और रखे हुए अनाज को नुकसान पहुंचाया। वनकर्मी झुंड को क्षेत्र से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

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चतरा के लरंगा सामेडीह गांव के पास मौजूद हाथियों का झुंड

चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित लरंगा सामेडीह गांव में बुधवार रात हाथियों का झुंड आबादी के पास पहुंच गया। हाथियों ने खेतों में लगी धान की फसल रौंद दी और चार घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद राहम पंचायत के इस गांव में रहने वाले परिवारों के बीच भय का माहौल है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, झुंड में करीब 15 से 16 हाथी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों ने लगभग 40 डिसमिल क्षेत्र में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। घरों में रखा करीब 10 क्विंटल अनाज भी बर्बाद होने की बात कही गई है। नुकसान का अंतिम आकलन अभी सामने नहीं आया है।

हाथियों के गांव के आसपास बने रहने के कारण लोग रातभर सतर्क रहे। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर घरों और फसलों की रक्षा करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने वनकर्मियों पर सूचना मिलने के बावजूद रात में मौके पर नहीं पहुंचने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और झुंड को सुरक्षित ढंग से जंगल की ओर भेजने की मांग की है।

मामले की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय थाने को दी गई। प्रभारी रेंजर ने ग्रामीणों से हाथियों के आने की सूचना मिलने की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, वनकर्मी झुंड को क्षेत्र की सीमा से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। विभाग को धान, अनाज और चार घरों को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी मिली है।

टंडवा का वन क्षेत्र करीब 21,349 हेक्टेयर में फैला है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, यहां पिछले लगभग डेढ़ दशक से हाथियों की आवाजाही होती रही है। कार्तिक से फाल्गुन के बीच झुंडों के इस इलाके में पहुंचने की घटनाएं स्थानीय स्तर पर लगातार सामने आती रही हैं।

वन क्षेत्र के आसपास खेतों में तैयार फसल और घरों में रखा अनाज हाथियों को आबादी के निकट ला सकता है। बस्तियों के विस्तार के बीच ऐसी आवाजाही से मानव-हाथी टकराव का जोखिम बढ़ता है। मौजूदा स्थिति में ग्रामीणों की सुरक्षा, झुंड की निगरानी और नुकसान का निष्पक्ष आकलन तत्काल आवश्यक माना जा रहा है।