चांडिल के छह गांवों के आसपास 14 हाथियों की आवाजाही, धान की फसल को नुकसान

चांडिल वन क्षेत्र में 14 हाथियों का झुंड गांवों और खेतों के आसपास घूम रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से रात्रि गश्त और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

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चांडिल वन क्षेत्र के पास खेतों में मौजूद हाथियों का झुंड

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र में 14 हाथियों के झुंड की आवाजाही से ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। गुरुवार सुबह काशीपुर गांव के पास हाथी दिखाई दिए। झुंड ने खेतों में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है।

काशीपुर के अलावा हुंड़रू, पाथरडीह, लाकड़ी, जुगीलांग और चातरमा लकड़ी गांव के आसपास भी हाथियों की गतिविधियां बताई गई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यह झुंड पिछले दो-तीन दिनों से कांदला जंगल में ठहरा हुआ है और शाम ढलने के बाद खेतों तथा आबादी की ओर निकल आता है।

हाथियों की मौजूदगी के कारण प्रभावित गांवों की दिनचर्या पर भी असर पड़ा है। अंधेरा होने के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। परिवारों को खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा की चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में खेतों और मकानों की निगरानी करना मुश्किल हो रहा है।

किसानों के सामने धान की तैयार हो रही फसल बचाने की चुनौती है। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी फसल रौंदने के साथ कभी-कभी घरों को भी नुकसान पहुंचाते हैं और वहां रखा धान या चावल खा जाते हैं। खेती पर निर्भर परिवारों को आशंका है कि फसल और मकान दोनों को क्षति होने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

बताया गया है कि झुंड में झारखंड और पश्चिम बंगाल क्षेत्र के हाथी शामिल हैं। दोनों राज्यों के वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। वन विभाग की टीम हाथियों को आबादी से दूर जंगल की ओर भेजने का प्रयास कर रही है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक झुंड दोबारा खेतों और गांवों की दिशा में लौट रहा है।

प्रभावित गांवों के लोगों ने वन विभाग से रात के समय गश्त बढ़ाने और हाथियों की लगातार निगरानी करने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि झुंड को आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों की सुरक्षा के साथ खेतों में लगी धान की फसल को भी बचाया जा सके।