सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल डैम को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। परियोजना प्रबंधन के अनुसार, जल प्रबंधन, सुरक्षा, जन-सरोकार और डैम के विभिन्न उपयोगों से जुड़ी तकनीकी रिपोर्ट तथा आंकड़े केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। अब विशेषज्ञ जूरी इन दस्तावेजों की समीक्षा कर अंतिम चयन पर निर्णय लेगी।
परियोजना के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार ने नामांकन की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य के बांधों में चांडिल डैम को इस प्रक्रिया के लिए चुना गया है। उनके मुताबिक झारखंड में कुल 67 डैम हैं। इनमें 58 पूरी तरह चालू हैं, पांच निर्माणाधीन हैं, जबकि तीन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और एक बिजली बोर्ड के अधीन है।
यह नामांकन अभी पुरस्कार मिलने की पुष्टि नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से गठित जूरी उपलब्ध कराई गई तकनीकी सूचनाओं, डैम की उपयोगिता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। इसी स्क्रीनिंग के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
चांडिल डैम को सिंचाई और जल संचय के साथ ऊर्जा उत्पादन की भावी योजना से भी जोड़ा जा रहा है। परियोजना के अधिकारी के अनुसार, यहां 600 मेगावाट क्षमता वाला तैरता सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करने की तैयारी है। यह संयंत्र डैम की जल सतह का उपयोग करते हुए हरित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में प्रस्तावित पहल है।
स्वर्णरेखा नदी पर बने इस डैम से विस्थापित परिवारों का मुद्दा भी जुड़ा रहा है। अधिकारी ने बताया कि पुरस्कार की मूल्यांकन प्रक्रिया में विस्थापितों को मिलने वाले लाभ, बांध की मजबूती और भविष्य की ऊर्जा परियोजना जैसे पहलुओं को भी सामने रखा जाएगा। उपलब्ध विवरण में चयन प्रक्रिया पूरी होने की कोई समयसीमा नहीं बताई गई है।
नामांकन से चांडिल और आसपास के क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना बनी है, लेकिन अंतिम परिणाम विशेषज्ञ जूरी की समीक्षा पर निर्भर करेगा। फिलहाल परियोजना प्रबंधन ने आवश्यक रिपोर्ट और आंकड़े जमा करने की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी है।