चांडिल में झारखंड आंदोलनकारियों की छह सूत्री मांग, नवंबर से आंदोलन की चेतावनी

झारखंड आंदोलनकारियों ने 1932 आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति, पेसा प्रावधानों के क्रियान्वयन और सम्मान राशि बढ़ाने सहित छह मांगों पर दो महीने में कार्रवाई मांगी है।

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चांडिल में छह सूत्री मांगों पर बैठक करते झारखंड आंदोलनकारी

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में झारखंड आंदोलनकारियों ने मंगलवार को बैठक कर राज्य सरकार के सामने छह सूत्री मांगें रखीं। आंदोलनकारियों ने इन मांगों पर दो महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया तो वे नवंबर से न्याय, मान-सम्मान और अधिकारों को लेकर आंदोलन शुरू करेंगे।

बैठक में जिले के अंतिम सर्वे सेटलमेंट को आधार बनाकर 1932 आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग प्रमुखता से उठी। आंदोलनकारियों का तर्क है कि ऐसी व्यवस्था से झारखंड के लोगों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिल सकेगी। उन्होंने इस विषय पर सरकार से स्पष्ट कदम उठाने की अपेक्षा जताई।

प्रतिनिधियों ने पेसा नियमावली-2025 में संशोधन करने और पेसा कानून-1996 के 23 प्रमुख प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की मांग भी रखी। बैठक में ग्राम सभाओं को उनके संवैधानिक अधिकार देने पर जोर दिया गया। इसके साथ वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा वन विभाग के अधिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग की गई।

आंदोलनकारियों ने सम्मान राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने और प्रत्येक आंदोलनकारी के एक आश्रित को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव रखा। वक्ताओं ने कहा कि अलग राज्य के निर्माण के आंदोलन में लोगों ने अपना जीवन और समय लगाया, लेकिन राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी अनेक आंदोलनकारी परिवार समस्याओं से जूझ रहे हैं।

बैठक में पश्चिमी सिंहभूम के मुफस्सिल थाना केस संख्या 73/89 के संदर्भ में आंदोलनकारियों के चिह्नितीकरण की उच्चस्तरीय जांच तथा जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने झारखंड में अगले 50 वर्षों तक भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी।

धनपति सरदार ने सरकार से सभी बिंदुओं पर समयबद्ध निर्णय लेने का आग्रह किया। बैठक में योगेश्वर बेसरा, बिजली मांझियान, सोनाराम सोरेन, सुखलाल हेंब्रम, शांति प्रधान, मृत्युंजय किस्कू और अन्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे। फिलहाल संगठन ने सरकार की प्रतिक्रिया के लिए दो महीने की अवधि तय की है।