बोकारो जिले के चास नगर निगम क्षेत्र में स्थित भोलूरबांध तालाब अतिक्रमण और प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। वार्ड 14 और 15 की घनी आबादी के बीच मौजूद इस जलस्रोत का दायरा लगातार कम होने की बात सामने आई है। स्थानीय निवासियों ने तालाब को बचाने के लिए नगर निगम से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
लोगों का आरोप है कि तालाब की जमीन पर मकान और अन्य निर्माण होने से उसका जलक्षेत्र सिमट रहा है। उनका कहना है कि संरक्षण से जुड़ी योजनाओं का प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। निवासियों ने तालाब की जमीन की मापी और सीमांकन कर अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई है।
प्रदूषण को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास के मोहल्लों के साथ अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल कचरा भी तालाब में डाला जा रहा है। किनारे पर इस्तेमाल की गई सिरिंज, दवाओं के पैकेट और दूसरे चिकित्सीय अपशिष्ट दिखाई देने का दावा किया गया है। इससे पानी दूषित होने और संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका है।
भोलूरबांध आसपास के कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। पुराना बाजार तथा तालाब से सटे मोहल्लों के लोग इसके पानी का दैनिक जरूरतों के अलावा पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और कर्मकांड में भी उपयोग करते हैं। निवासियों का कहना है कि तालाब समाप्त हुआ तो जल उपलब्धता के साथ स्थानीय सामाजिक और धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी।
स्थानीय संजय प्रमाणिक और बनमाली दत्ता ने तालाब का सीमांकन कराने, अवैध कब्जे हटाने, कचरा डालने पर रोक लगाने तथा संरक्षण और सौंदर्यीकरण की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि समय पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जनहित याचिका दायर करने का रास्ता अपनाया जा सकता है।
चास नगर निगम के अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार के अनुसार, मामले का निरीक्षण कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जलस्रोतों पर हुए अतिक्रमण हटाने की बात भी कही है। अब स्थानीय लोगों की निगाह निरीक्षण, कचरा रोकने की व्यवस्था और तालाब के संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर है।