पलामू जिले के चैनपुर में बाल श्रम के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान आठ बच्चों को विभिन्न होटलों में काम करते पाया गया। श्रम विभाग की टीम ने उन्हें वहां से मुक्त कराने के बाद बाल कल्याण समिति को सौंप दिया। विभाग के अनुसार, बच्चों की उम्र आठ से साढ़े 13 वर्ष के बीच है।
जिला श्रम अधीक्षक अमित कुमार चौधरी ने बताया कि यह जांच उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के निर्देश पर जिला टास्क फोर्स ने की। टीम ने चैनपुर क्षेत्र में संचालित अलग-अलग प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और बाल श्रम की पहचान होने पर कार्रवाई की। मुक्त कराए गए सभी बच्चे होटलों में काम कर रहे थे।
अभियान में चैनपुर और पाटन के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बाल कल्याण समिति तथा गैर सरकारी संस्था अग्रगति के प्रतिनिधि शामिल रहे। बच्चों को समिति के संरक्षण में देने के बाद उनके मामलों में आगे की प्रक्रिया शुरू की गई है। उपलब्ध विवरण में संबंधित प्रतिष्ठानों के नाम नहीं बताए गए हैं।
श्रम विभाग ने अभियान का उद्देश्य बच्चों को काम से हटाकर शिक्षा से जोड़ना और उनके बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार करना बताया है। अधिकारियों ने बाल श्रम को बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए प्रतिष्ठान संचालकों और नियोजकों को निर्धारित नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है।
विभाग के मुताबिक, बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने वाले नियोजक को छह महीने से दो वर्ष तक की कैद या 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोनों दंड एक साथ भी दिए जा सकते हैं।
दोबारा बाल श्रम कराते पकड़े जाने पर एक से तीन वर्ष तक की कैद का प्रावधान बताया गया है। फिलहाल मुक्त कराए गए आठों बच्चों से जुड़े मामलों की आगे की कार्रवाई बाल कल्याण समिति और संबंधित विभागों के स्तर पर की जा रही है।