रांची में जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने की उनकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।
मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से संबंधित है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय इस जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है। ये आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से हाई कोर्ट में निचली अदालत की कार्यवाही रोकने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, निचली अदालत में आरोप गठन के प्रश्न पर 19 सितंबर को सुनवाई निर्धारित है।
मामले में मुख्यमंत्री ने डिस्चार्ज से संबंधित आदेश को भी चुनौती दी है। इस पहलू पर हाई कोर्ट में 14 अक्टूबर को सुनवाई होने की जानकारी दी गई है। अदालत की आगामी कार्यवाही में संबंधित पक्ष अपने कानूनी तर्क रख सकेंगे।
इस प्रकरण में जमीन के अधिग्रहण और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर जांच एजेंसी ने आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया है। सुनवाई रोकने की मांग खारिज होने का अर्थ आरोपों की अंतिम पुष्टि या दोषसिद्धि नहीं है; उस पर निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब ध्यान निचली अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगा। वहां आरोप गठन से संबंधित प्रक्रिया पर विचार होना है, जबकि डिस्चार्ज के मुद्दे पर हाई कोर्ट की अगली तारीख अलग से निर्धारित है।