दुमका जिले के जरमुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आउटसोर्सिंग कर्मियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य तथा झारखंड पैरामेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारी चार नवंबर से अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी कर्मियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने आउटसोर्सिंग प्रोक्योरमेंट एक्ट 2025 के तहत नियम तय किए हैं। उनके अनुसार, निविदा प्रक्रिया के दौरान संबंधित नियोक्ता कंपनियों ने इन प्रावधानों को स्वीकार करते हुए सहमति भी दी थी।
कर्मचारियों का आरोप है कि सहमति के बावजूद नियमों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। उनका कहना है कि प्रोक्योरमेंट नियमावली में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत मानव संसाधन के पारिश्रमिक और अन्य आवश्यक प्रावधान स्पष्ट हैं, लेकिन भुगतान निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप नहीं हो रहा है।
धरने पर बैठे कर्मियों ने 26 दिनों के आधार पर वेतन दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस व्यवस्था को समाप्त कर नियमानुसार पूर्ण वेतन देने की मांग की। कर्मचारियों के मुताबिक, भुगतान संबंधी विसंगतियों के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने 11 से 12 महीने के लंबित वेतन के शीघ्र भुगतान की मांग भी रखी है। इसके साथ ही उन्होंने सभी कर्मियों के पारिश्रमिक में मौजूद अंतर दूर करने और समान तथा नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। ये सभी दावे और मांगें आंदोलनरत कर्मचारियों की ओर से सामने रखी गई हैं।
कर्मियों ने संबंधित नियोक्ता कंपनियों की कथित मनमानी पर रोक लगाने तथा आउटसोर्सिंग प्रोक्योरमेंट एक्ट 2025 के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कराने की मांग की है। उपलब्ध विवरण में धरना समाप्त होने या मांगों पर किसी समझौते की जानकारी नहीं दी गई है, इसलिए कार्य बहिष्कार फिलहाल अनिश्चितकालीन बताया गया है।