रांची में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कनीय विद्युत अभियंता भर्ती परीक्षा-2021 के प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के पूर्व निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा की कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस की केस डायरी के मुताबिक, आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका अरुण परीक्षा से जुड़ी गोपनीय प्रक्रियाओं में सक्रिय था।
रांची पुलिस ने अरुण कुमार को सात अगस्त को मुंबई से गिरफ्तार किया था। इसके बाद सीआईडी ने 13 से 17 अगस्त तक उससे पूछताछ की। जांच में जेपीएससी की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक, ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी और दूसरी अनियमितताओं से जुड़े आरोप भी सामने आए, जिसके बाद उसे जेपीएससी से संबंधित मामले में भी आरोपी बनाया गया।
नामकुम थाने में 2022 में दर्ज मुकदमे की केस डायरी के अनुसार, अरुण ने 26 अगस्त 2019 को मेसर्स बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, पुलिस का दावा है कि इसके बाद भी एजेंसी के वास्तविक कामकाज पर उसका नियंत्रण बना रहा। आयोग के तत्कालीन सचिव और परीक्षा नियंत्रक के बयानों में भी गोपनीय बैठकों में उसकी मौजूदगी का उल्लेख किया गया है।
आयोग ने एजेंसी को प्रश्नपत्रों की छपाई, परीक्षा केंद्रों पर बायोमीट्रिक और फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार करने, ओएमआर शीट की स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग तथा अंतिम परिणाम तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। पुलिस का आरोप है कि इसी पहुंच का दुरुपयोग कर तीन जुलाई 2022 को प्रस्तावित परीक्षा से पहले सीलबंद प्रश्नपत्र व्हाट्सएप के माध्यम से बाहर भेजा गया।
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अभिषेक कुमार और अभ्यर्थी पंकज कुमार मंडल ने कथित सिंडिकेट के कामकाज से जुड़ी जानकारी दी थी। उनके बयानों के अनुसार, अभ्यर्थियों से 15 लाख रुपये या उससे अधिक लेकर हल किया हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता था। पुलिस का कहना है कि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को गोपनीय ठिकानों पर ले जाकर उत्तर याद कराए गए थे। ये सभी दावे अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।