रांची में झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी ने अदालत के समक्ष केस डायरी पेश की है। जांच एजेंसी ने इसमें परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया संभालने वाली एजेंसी, प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कर्मियों और कथित परीक्षा माफिया के बीच संबंध होने का दावा किया है। ये बातें अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
सीआईडी के अनुसार, आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ सोमांश प्रकाश और प्रिंटिंग कार्य से जुड़े राहुल कुमार ने हरियाणा के मानेसर तथा राजस्थान स्थित प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकाले। एजेंसी का आरोप है कि गोपनीय सामग्री व्हाट्सएप के माध्यम से अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंचाई गई।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मानेसर की प्रिंटिंग इकाई के रजिस्टर में राहुल की प्रविष्टि दर्ज है। सीआईडी का दावा है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन के विश्लेषण से भी प्रश्नपत्रों की छपाई के समय उसकी फैक्ट्री में मौजूदगी का संकेत मिला। एजेंसी के मुताबिक, उसके जरिए सामग्री सोमांश और फिर आरके सिंह उर्फ मिथिलेश सिंह समेत अन्य लोगों तक पहुंची।
केस डायरी में यह भी कहा गया है कि प्रिंटिंग और निगरानी से जुड़े कुछ आरोपी स्वयं अभ्यर्थी बनकर परीक्षा में बैठे थे। सीआईडी के अनुसार, समीर कुमार परीक्षा में सफल होकर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी बना, जबकि राहुल कुमार भी परीक्षा में शामिल हुआ था। सोमांश और राहुल को 27 अगस्त को रांची के हिनू स्थित एक होटल से तथा समीर को 30 अगस्त को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।
जांच में कुछ अभ्यर्थियों और उनसे जुड़े लोगों के खातों से दिलीप पासवान के खाते में रकम आने का दावा भी किया गया है। सीआईडी इन लेनदेन की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी का आरोप है कि कथित नेटवर्क अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करता था।
सीआईडी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित सीतुलपुर के एक क्वार्टर में परीक्षा से पहले 30 से 35 अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर याद कराए गए थे। अदालत में प्रस्तुत विवरण जांच एजेंसी के दावे हैं; आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।