रांची में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े छात्र आंदोलन को लेकर गुरुवार को इंडिया गठबंधन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात की। प्रोजेक्ट भवन पहुंचे प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपकर आंदोलन के दौरान कथित रूप से उपद्रव और अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और भाकपा माले के नेता शामिल थे। इनमें विनोद पांडे, राजेश ठाकुर, केशव महतो कमलेश, ममता देवी, राजेश कच्छप, एमटी राजा, विकास मुंडा, सुरेश बैठा और मनोज यादव के नाम बताए गए हैं। मुलाकात के बाद गठबंधन के नेताओं ने कहा कि उनकी मांग आंदोलन में छात्रों और कथित अराजक तत्वों की भूमिका को अलग-अलग देखकर कार्रवाई करने की है।
झामुमो महासचिव विनोद पांडे ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से मांग रखने वाले निर्दोष छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। यह गठबंधन के प्रतिनिधियों का पक्ष है; मुख्य सचिव या राज्य सरकार की ओर से ज्ञापन पर किसी निर्णय की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भी कहा कि जिन निर्दोष छात्रों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है, उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक चेहरे आंदोलन में शामिल होकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल ने ऐसे लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कदम उठाने का अनुरोध किया।
राजद प्रतिनिधि मनोज यादव ने सुझाव दिया कि आंदोलन की उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्डिंग देखकर भीड़ में शामिल कथित उपद्रवी तत्वों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की पहचान की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को समझते हुए वास्तविक प्रदर्शनकारियों और उपद्रव में शामिल लोगों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
इससे एक दिन पहले भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्य सचिव से मुलाकात की थी। भाजपा ने छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग करते हुए राज्य सरकार को 48 घंटे का समय दिया था। अब इंडिया गठबंधन ने अलग ज्ञापन देकर शांतिपूर्ण छात्रों को राहत और कथित उपद्रवियों पर कार्रवाई की मांग रखी है। दोनों पक्षों की मांगों के बाद आगे का निर्णय सरकार और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर होना है।