रांची में जेपीएससी नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मामले में पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता की जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए इसे 15 सितंबर को सुनाने की बात कही है।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और देवर्षि मंडल ने अदालत में दलील दी कि नियुक्ति परीक्षा के लिए टीडीपीएल के चयन में श्वेता गुप्ता की भूमिका नहीं थी। उनका कहना था कि संबंधित कंपनी के साथ अनुबंध लिखित आदेश मिलने के बाद ही किया गया था। ये दलीलें अभी न्यायिक विचार के अधीन हैं।
बचाव पक्ष ने सीआईडी के उस आरोप पर भी सवाल उठाया, जिसमें टीडीपीएल के कर्मचारी उस्मान को व्हाट्सऐप पर उत्तर कुंजी भेजे जाने की बात कही गई है। अधिवक्ताओं के अनुसार, उत्तर कुंजी आयोग की वेबसाइट पर जारी होने के बाद भेजी गई थी। इसी आधार पर उन्होंने जमानत देने का अनुरोध किया।
सीआईडी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दावा किया कि परीक्षा संबंधी कथित गड़बड़ी में श्वेता गुप्ता की भूमिका रही है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तत्काल निर्णय नहीं दिया। श्वेता गुप्ता 22 जुलाई को गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं और उन्होंने तीन अगस्त को जमानत याचिका दाखिल की थी।
इसी मामले में अभ्यर्थी सौरव सुमन की नियमित जमानत याचिका और पवन कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। सौरव सुमन को सीआईडी ने 30 जुलाई को गिरफ्तार किया था और उन्होंने 10 अगस्त को जमानत मांगी थी। पवन कुमार सिंह ने 22 अगस्त को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया था।
दोनों अर्जियों पर सुनवाई नौ सितंबर को पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखा गया था। अदालत के निर्णय से फिलहाल श्वेता गुप्ता की जमानत का प्रश्न लंबित है, जबकि अन्य दोनों आवेदकों को इस चरण में राहत नहीं मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी नहीं हुआ है।