रांची सहित झारखंड के छह जिलों में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 60 एगकार्ट वितरित किए गए हैं। राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति की इस पहल के तहत चयनित महिलाओं को अंडे बेचने के लिए तैयार ठेले उपलब्ध कराए गए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य अंडे की बिक्री को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं के लिए आय का साधन तैयार करना है।
रांची, गुमला, लोहरदगा, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम और गोड्डा में दस-दस एगकार्ट दिए गए हैं। लाभार्थी महिलाएं किसान उत्पादक संगठनों या स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उनका चयन प्रदान संस्था के साथ काम करने वाले क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से किया गया है।
चयन प्रक्रिया के तहत पहले ग्रामसभा की बैठक में योजना की जानकारी दी गई और इच्छुक महिलाओं से आवेदन मांगे गए। इसके बाद यह आकलन किया गया कि आवेदक एगकार्ट के माध्यम से कारोबार संचालित करने में सक्षम हैं या नहीं। जांच के बाद क्लस्टर लेवल फेडरेशन ने लाभार्थियों के नामों को स्वीकृति दी।
समिति के मुख्य परिचालन अधिकारी ए कुमार के अनुसार, झारखंड के प्रत्येक जिले में 250 एगकार्ट बांटने की योजना है और इसे लगभग तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अगले वित्तीय वर्ष में राज्य के सभी 24 जिलों में 25-25 एगकार्ट देने की भी योजना है। संस्था ने इस वर्ष देशभर में 2,300 एगकार्ट वितरित किए हैं, जिस पर 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
लाभार्थियों से कहा गया है कि वे कारोबार से होने वाली आय में से कुछ राशि बचाकर अपने समूह में जमा करें। इस व्यवस्था का उद्देश्य आगे चलकर समूह की दूसरी महिलाओं के लिए भी एगकार्ट खरीदना आसान बनाना है। समिति ने बोकारो की एक लाभार्थी का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने करीब छह महीने की कमाई से एक जनरल स्टोर भी खोला है।
योजना के संचालन पर क्लस्टर लेवल फेडरेशन निगरानी रखेगा। एगकार्ट चलाने में किसी लाभार्थी को परेशानी आने पर उसे आवश्यक सहायता देने की व्यवस्था भी बताई गई है। इस तरह पहल में केवल ठेला उपलब्ध कराने के बजाय चयन, निगरानी और समूह आधारित वित्तीय सहयोग को भी शामिल किया गया है।