रांची में राज्य सरकार ने सरकारी कोषागारों से होने वाले भुगतान की प्रक्रिया को पेपरलेस बनाने की दिशा में नई व्यवस्था लागू कर दी है। वित्त विभाग के निर्देश के अनुसार एक सितंबर से सभी प्रकार के बिलों का भुगतान ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से किया जाना है। कागजी विपत्र अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
नई प्रणाली के दायरे में सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, आकस्मिक व्यय, यात्रा भत्ता, हाउस बिल्डिंग एडवांस और मोटर कार एडवांस सहित अन्य भुगतान शामिल हैं। राज्य में कुल 33 कोषागार और उप कोषागार हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनसे हर महीने औसतन करीब 3,205 करोड़ रुपये की निकासी होती है।
वित्त विभाग ने अगस्त में ही सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को डिजिटल व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कई विभागों में अधीनस्थ कर्मचारियों का डिजिटल डाटा अभी तक अपडेट नहीं हो पाया है। इस कारण नई व्यवस्था के शुरुआती चरण में वेतन भुगतान प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।
ई-वाउचर प्रणाली में विभागों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के साथ मेकर और चेकर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वित्तीय निकासी से पहले वे डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट से जुड़े विवरण और विपत्र की जांच करेंगे। किसी आपत्ति को ऑनलाइन दर्ज करने और उसका निपटारा करने की सुविधा भी रहेगी। इससे बिल को कागजी रूप में अलग-अलग कार्यालयों से गुजारने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार राज्य में 1,78,445 नियमित सरकारी कर्मचारी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों में करीब 1.60 लाख संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं। पंजीकृत सरकारी और पारिवारिक पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 1,48,277 बताई गई है। नई डिजिटल प्रक्रिया का असर इनसे जुड़े वेतन, भत्ते और पेंशन भुगतान पर भी पड़ेगा।
झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ ने व्यवस्था का स्वागत किया है, लेकिन त्योहारों के समय लंबित प्रोफाइल अपडेट के कारण भुगतान में देरी की चिंता जताई है। महासंघ ने फिलहाल पुराने विकल्प को जारी रखने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों की ओर से डिजिटल व्यवस्था के साथ साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया है।