रांची में जारी खान एवं भूतत्व विभाग के जिलावार ब्योरे के अनुसार, झारखंड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में खनन राजस्व के वार्षिक लक्ष्य का 30.66 प्रतिशत हासिल किया है। राज्य के लिए 27,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके मुकाबले जुलाई तक 8,277.48 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई।
विभागीय आंकड़ों में लक्ष्य प्राप्ति के अनुपात के आधार पर चतरा और हजारीबाग सबसे आगे हैं। चतरा ने अपने लक्ष्य का 42.27 प्रतिशत जुटाते हुए 771.16 करोड़ रुपये प्राप्त किए। हजारीबाग में 1,088.47 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो जिले के तय लक्ष्य का 40.30 प्रतिशत है।
कुछ अन्य जिलों का प्रदर्शन भी राज्य के औसत से बेहतर रहा। लोहरदगा ने लक्ष्य का 35.87 प्रतिशत, लातेहार ने 35.43 प्रतिशत, पाकुड़ ने 34.51 प्रतिशत और रामगढ़ ने 33.74 प्रतिशत राजस्व जुटाया। दूसरी ओर गढ़वा में लक्ष्य का 4.96 प्रतिशत, खूंटी में 5.18 प्रतिशत, कोडरमा में 6.54 प्रतिशत और सिमडेगा में 6.72 प्रतिशत संग्रह दर्ज हुआ।
इस वर्ष जुलाई तक का कुल संग्रह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि से अधिक है। उपलब्ध ब्योरे के मुताबिक जुलाई 2025 तक राज्य को 5,137.37 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि जुलाई 2026 तक यह राशि बढ़कर 8,277.48 करोड़ रुपये हो गई। विभागीय विवरण में पिछले वर्ष कुछ जिलों में सेस की कम वसूली का कारण पत्थर खदानों की लीज का समय पर नवीनीकरण नहीं होना बताया गया है।
खनिज वाली भूमि पर उपकर से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,487.91 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष में इस मद से 13,800 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है और अप्रैल से जुलाई के बीच करीब 4,400 करोड़ रुपये की वसूली बताई गई है।
इसी बीच केंद्रीय खनिज कानून में संशोधन के संभावित वित्तीय प्रभाव पर राज्य में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। राज्य सरकार ने सालाना करीब 14,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुनर्विचार की अपील की है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संशोधन का समर्थन करते हुए दावा किया है कि इससे अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।