रांची में खनिज अन्वेषण से जुड़े अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की बैठक में झारखंड की खनन अर्थव्यवस्था को कोयले से आगे ले जाने की जरूरत पर चर्चा हुई। खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने लिथियम और पन्ना समेत महत्वपूर्ण एवं उच्च मूल्य वाले खनिजों पर ध्यान बढ़ाने तथा पर्यावरण-अनुकूल खनन की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया।
सचिव ने कहा कि झारखंड की पहचान समृद्ध खनिज संपदा से जुड़ी है, लेकिन इसे आर्थिक विकास में बदलने के लिए विभागीय प्रक्रियाओं में बदलाव आवश्यक है। उनके मुताबिक, खनिजों की खोज के बाद उन्हें व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने और खनन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। राज्य की बड़ी आबादी की आजीविका भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खनन से जुड़ी हुई है।
बैठक में बदलती वैश्विक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन को लेकर नीतियों में बदलाव तथा कम कार्बन वाले उत्पादन पर बढ़ते जोर के बीच पारंपरिक कार्बन आधारित अर्थव्यवस्था के सामने भविष्य में चुनौतियां आने की बात कही गई। सचिव के अनुसार, राज्य अभी कोयला उत्पादन में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन इसकी वृद्धि हमेशा समान गति से जारी नहीं रह सकती।
विभाग ने खनिज अन्वेषण को तेज, प्रभावी और अधिक सटीक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के उपयोग पर भी चर्चा की। अरवा राजकमल ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञ राज्य के खनिज संसाधनों की खोज और उनके उपयोग की भावी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए अन्वेषण से लेकर खनन और आर्थिक उपयोग तक की प्रक्रिया को नई तकनीक के अनुरूप विकसित करना जरूरी बताया गया।
खान निदेशक राहुल सिन्हा ने अगले 10 और 20 वर्षों के साथ उससे आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक नीतियां बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूतात्विक अन्वेषण और रिपोर्ट तैयार करते समय ही वन क्षेत्र, भूमि, सीमांकन तथा पर्यावरण से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान कर लेने से नीलामी और खनन लीज की आगे की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
बैठक में खदान शुरू करने के साथ ही अंतिम खदान-बंदी योजना पर ध्यान देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। इसका उद्देश्य खनन समाप्त होने के बाद पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा को योजना का हिस्सा बनाना है। अधिकारियों ने खनिज उत्पादन और अन्वेषण बढ़ाते हुए सतत तथा पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई।