झारखंड में गृह जिले से बाहर आपदा में मौत पर भी आश्रितों को मिलेगा अनुग्रह अनुदान

झारखंड सरकार ने मुआवजा नीति में संशोधन किया है। अधिसूचित आपदा में दूसरे जिले, राज्य या विदेश में नागरिक की मृत्यु होने पर तय शर्तों के तहत उसके आश्रित राहत राशि पा सकेंगे।

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झारखंड में आपदा अनुग्रह अनुदान की संशोधित व्यवस्था से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

झारखंड के किसी नागरिक की अधिसूचित आपदा में अपने गृह जिले से बाहर मृत्यु होने पर भी उसके आश्रित अब अनुग्रह अनुदान के पात्र हो सकेंगे। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने मुआवजा नीति में संशोधन कर दूसरे जिले, दूसरे राज्य या विदेश में हुई ऐसी मृत्यु को भी इसके दायरे में शामिल किया है। नई व्यवस्था निर्धारित शर्तें पूरी होने पर लागू होगी।

इस प्रस्ताव को 25 अगस्त 2026 की मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी मिली थी। इसके बाद विभाग की सचिव विप्रा भाल के हस्ताक्षर से संकल्प जारी किया गया। संशोधित व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। इसका उद्देश्य निवास जिले से बाहर हुई आपदा संबंधी मृत्यु के मामलों में आश्रितों के अनुदान की प्रक्रिया तय करना है।

नए प्रावधान के अनुसार, अनुग्रह अनुदान का भुगतान मृतक के मूल गृह जिले से होगा। घटना की पुष्टि मृत्यु वाले स्थान के सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से कराई जाएगी। मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी और जांच रिपोर्ट जैसे जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद संबंधित गृह जिले के उपायुक्त भुगतान की कार्रवाई करेंगे।

एक ही मृत्यु के लिए दो स्थानों से अनुदान दिए जाने से रोकने का प्रावधान भी किया गया है। आश्रित को शपथपत्र देकर घोषित करना होगा कि उसे किसी अन्य कार्यालय से अनुग्रह अनुदान नहीं मिला है। इस दस्तावेजी प्रक्रिया के आधार पर संबंधित जिला पात्रता और भुगतान पर निर्णय लेगा।

सरकार की ओर से मृतक के बीमा का प्रीमियम जमा किए जाने की स्थिति में आश्रित को आपदा अनुग्रह अनुदान और बीमा राशि में से किसी एक लाभ का चयन करना होगा। यदि बीमा प्रीमियम का भुगतान मृतक ने स्वयं किया था, तो आश्रित अनुग्रह अनुदान पाने का पात्र होगा।

संशोधित व्यवस्था वज्रपात, अतिवृष्टि, सर्पदंश, खनन जनित आपदा, पानी में डूबने, भगदड़, गैस रिसाव, सड़क दुर्घटना, आंधी-तूफान और ग्रीष्म लहर सहित अधिसूचित प्राकृतिक तथा विशिष्ट स्थानीय आपदाओं पर लागू होगी। प्रत्येक मामले में घटना का सत्यापन और आवश्यक अभिलेखों की उपलब्धता अनिवार्य रहेगी।