झारखंड में हाथियों की आवाजाही के तीन नए गलियारे चिह्नित, संरक्षण पर जोर

मानसून के बाद की सैटेलाइट और डिजिटल तस्वीरों से हाथियों के तीन नए मार्गों की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों ने इन गलियारों को सुरक्षित रखने की जरूरत बताई है।

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झारखंड के जंगल में विचरण करता हाथियों का झुंड

रांची: झारखंड में हाथियों की आवाजाही के तीन नए गलियारे चिह्नित किए गए हैं। मानसून समाप्त होने के बाद सितंबर में जंगलों की सैटेलाइट और डिजिटल तस्वीरों के अध्ययन से इन मार्गों की पुष्टि हुई। ये गलियारे राज्य के कई जिलों को जोड़ते हैं और हाथियों के नए विचरण क्षेत्र के रूप में सामने आए हैं।

सामने आई जानकारी के अनुसार, दलमा क्षेत्र से निकलने वाले हाथी रांची और लोहरदगा होते हुए गिरिडीह तथा हजारीबाग के रास्ते दुमका तक पहुंच रहे हैं। एक अन्य मार्ग पर उनका विचरण गिरिडीह और बोकारो से रामगढ़ तक दर्ज किया गया है। दुमका से रामगढ़ के बीच भी हाथियों की आवाजाही देखी गई है।

इन क्षेत्रों में लगातार पांचवें वर्ष 30 से अधिक हाथियों का झुंड विचरण करता मिला है। वन्यजीव विशेषज्ञ शहजाद आलम के अनुसार, खनन और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों के कारण हाथियों के पारंपरिक गलियारों में आवागमन बाधित हुआ है। ऐसे में नए रास्ते उनके सुरक्षित आवागमन और जीवन की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

बताया गया है कि नए मार्गों पर हाथियों के लिए भोजन की पर्याप्त उपलब्धता है। इन इलाकों में औद्योगिक और खनन गतिविधियां अपेक्षाकृत कम हैं तथा रात में शांति रहती है। इन परिस्थितियों को हाथियों द्वारा नए मार्ग अपनाने से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक नरेन्द्र मिश्रा ने इन गलियारों के संरक्षण पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, हजारीबाग के पास रांची-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने डिवाइडर को छोड़कर इन रास्तों पर हाथियों की आवाजाही में कोई बड़ी बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में गलियारों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के जंगलों में अभी करीब 600 हाथी हैं, हालांकि दो वर्ष पहले केंद्र सरकार की गणना में संख्या अलग थी। मिश्रा के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच हाथियों की संख्या में कमी नहीं आने के पीछे नए गलियारों की भूमिका हो सकती है। यह आकलन संभावित संबंध बताता है; नए मार्गों का दीर्घकालीन संरक्षण अब महत्वपूर्ण विषय बनकर सामने आया है।