झारखंड में 1.28 करोड़ लोगों की कैंसर स्क्रीनिंग, समर्पित पोर्टल और ऐप की तैयारी

एनसीडी कार्यक्रम के तहत वर्ष 2022 से झारखंड में मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग अब जांच, पहचान और इलाज से जुड़ी जानकारी के लिए पोर्टल व ऐप तैयार करेगा।

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झारखंड में कैंसर स्क्रीनिंग और इलाज के आंकड़ों के लिए प्रस्तावित डिजिटल पोर्टल

रांची में स्वास्थ्य विभाग कैंसर की जांच, पहचान और इलाज से जुड़ी सेवाओं तथा आंकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए एक समर्पित पोर्टल और ऐप बनाने की तैयारी कर रहा है। यह पहल राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत राज्य में चल रही कैंसर नियंत्रण गतिविधियों से जुड़ी है। कार्यक्रम में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, हृदय रोग और स्ट्रोक सहित विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग व इलाज का प्रावधान है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक झारखंड में 128 लाख लोगों की मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा से संबंधित तीन प्रमुख कैंसर की स्क्रीनिंग की गई है। जांच के दौरान 2 लाख 63 हजार लोगों को संदिग्ध मानते हुए आगे की जांच कराई गई। इनमें 976 लोगों में कैंसर की पुष्टि होने की जानकारी दी गई है।

राज्य के एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. रवि राज ने इन आंकड़ों को अधूरा बताया है। उनके मुताबिक कई मामले राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाते, इसलिए वास्तविक संख्या उपलब्ध आंकड़ों से अधिक हो सकती है। उन्होंने कैंसर नियंत्रण के क्षेत्र में अभी और काम किए जाने की आवश्यकता भी बताई।

स्वास्थ्य विभाग के प्रस्तावित पोर्टल और ऐप का उद्देश्य स्क्रीनिंग से लेकर बीमारी की पहचान और इलाज तक की जानकारी को एक व्यवस्था में जोड़ना है। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य स्तर पर अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। झासा अध्यक्ष एवं रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह के अनुसार, इस व्यवस्था से दूरदराज के मरीजों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

रांची सदर अस्पताल में फिलहाल मैमोग्राफी, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच, ट्यूमर मार्कर जांच और माइनर कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। डॉ. सिंह ने इन सुविधाओं का विस्तार किए जाने की बात कही है। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों की जांच और इलाज से संबंधित अधिकृत विवरण जुटाने में भी मदद मिलने की संभावना जताई गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार एनसीडी कार्यक्रम को वित्तीय और तकनीकी सहयोग देती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना के तहत कैंसर मरीजों के इलाज तथा राज्यों में जरूरी स्वास्थ्य ढांचे के विकास के लिए भी सहयोग का प्रावधान है। राज्य का नया पोर्टल इसी व्यापक व्यवस्था के भीतर कैंसर मामलों के पंजीकरण और सेवाओं तक पहुंच सुधारने की दिशा में प्रस्तावित कदम है।