झारखंड में स्कूल से बाहर रह गए या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की पहचान के लिए शिशु पंजी अद्यतन करने की तैयारी शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की इस प्रक्रिया में 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों की संख्या, स्कूलों में उनके नामांकन और अनामांकित बच्चों की जानकारी जुटाई जाएगी। सर्वे का संभावित कार्यारंभ 10 नवंबर 2026 निर्धारित किया गया है।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों, जिला शिक्षा अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार, सर्वे से पहले डहर पोर्टल पर सरकारी स्कूलों के साथ आसपास के गांवों और टोलों की मैपिंग की जाएगी। इसके बाद शिक्षकों को संबंधित गांव, टोले और घरों से टैग किया जाएगा।
प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, अवर विद्यालय निरीक्षक और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी की देखरेख में प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को 25 अक्टूबर तक स्कूलों को टैगिंग आदेश उपलब्ध कराने हैं। प्रधानाध्यापक अपने स्कूल से जुड़े गांवों और टोलों के घरों की कुल संख्या पोर्टल पर दर्ज करेंगे।
निर्देश में कहा गया है कि किसी गांव, टोले या घर को एक से अधिक स्कूलों के साथ नहीं जोड़ा जाए। इसका उद्देश्य घरों का दोबारा सर्वे रोकना और किसी परिवार को सर्वे से छूटने नहीं देना है। क्षेत्रों का बंटवारा घरों और उपलब्ध शिक्षकों की संख्या को ध्यान में रखकर होगा। एकल शिक्षक वाले स्कूलों को अपेक्षाकृत कम टोले और परिवार देने को कहा गया है।
इस अभियान में सरकारी स्कूलों के अलावा गैर-सरकारी सहायता प्राप्त, अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त, संस्कृत और मदरसा विद्यालयों के शिक्षकों की भी मदद ली जाएगी। शिक्षकों की टैगिंग से जुड़ी रिपोर्ट डहर पोर्टल पर अपलोड कर 7 नवंबर 2026 तक फ्रीज करनी होगी। स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति या नई नियुक्ति की स्थिति में मैपिंग में आवश्यक बदलाव भी किए जाएंगे।
पिछले सत्र 2025-26 की राज्यस्तरीय शिशु पंजी संकलन रिपोर्ट में 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 29,995 बच्चे स्कूल से बाहर चिह्नित किए गए थे। इनमें 16,375 लड़के, 13,615 लड़कियां और पांच ट्रांसजेंडर बच्चे शामिल थे। नई कवायद का उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान कर यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित आयु वर्ग का कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।