झारखंड में 2000 से अगस्त 2026 तक नक्सलियों से 682 हथियार बरामद: पुलिस आंकड़े

पुलिस आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 26 वर्षों के दौरान बरामद हथियारों में 93 एके-47, 111 इंसास, 123 एसएलआर और 247 प्वाइंट 303 राइफल शामिल हैं।

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झारखंड में नक्सलियों से बरामद हथियारों पर जारी पुलिस आंकड़ों की प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में सामने आए पुलिस आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में वर्ष 2000 से अगस्त 2026 तक नक्सलियों से कुल 682 हथियार बरामद किए गए। इनमें अलग-अलग श्रेणी की राइफल, मशीन गन और कार्बाइन शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चलाए गए अभियानों से प्रतिबंधित संगठनों के हथियारबंद नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिली।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, बरामद हथियारों में 93 एके-47, 10 लाइट मशीन गन, 111 इंसास राइफल, 123 एसएलआर, 247 प्वाइंट 303 राइफल और 28 कार्बाइन हैं। इनके अलावा 70 अन्य हथियार भी मिले। संख्या के लिहाज से प्वाइंट 303 राइफल की बरामदगी सबसे अधिक रही।

वर्षवार रिकॉर्ड बताता है कि 2000 से 2004 के बीच नक्सलियों से किसी हथियार की बरामदगी दर्ज नहीं हुई थी। वर्ष 2005 में पहली बार तीन हथियार मिले। इसके बाद 2007 और 2008 में 43-43 हथियार बरामद हुए, जबकि 2018 में यह संख्या 45 रही। एक वर्ष में सबसे अधिक 59 हथियारों की बरामदगी 2022 में दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, केवल 2026 में अगस्त तक 15 एके-47, एक लाइट मशीन गन और 17 इंसास राइफल बरामद की गईं। यह विवरण दीर्घ अवधि में हुई कुल बरामदगी का हिस्सा है और अलग-अलग अभियानों, गिरफ्तारियों तथा आत्मसमर्पण के बाद मिले हथियारों को समेटता है।

झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नरेंद्र कुमार सिंह ने नक्सलियों के कमजोर होने में हथियारों की जब्ती को एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उनके मुताबिक, पुलिस और केंद्रीय बलों से पहले लूटे गए हथियारों में से 99.9 प्रतिशत वापस बरामद किए जा चुके हैं। यह दावा पुलिस अधिकारी के बयान पर आधारित है।

पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों के दबाव के दौरान कई कैंप और बंकर छोड़े गए तथा जंगलों में जमीन के नीचे छिपाए गए कुछ हथियार लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं हो सके। प्रस्तुत आंकड़े राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान हथियारों की बरामदगी का संचित रिकॉर्ड दिखाते हैं।