रांची में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के लिए लोगों को नया जाति या आवासीय प्रमाणपत्र बनवाने की जरूरत नहीं है। सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत नागरिकों के पास पहले से मौजूद वैध दस्तावेजों और अभिलेखों के आधार पर किया जाना है।
उन्होंने बुधवार को राज्य के सभी जिलों के कॉमन सर्विस सेंटर प्रबंधकों और उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि नागरिकों को केवल SIR के उद्देश्य से नए प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रेरित या बाध्य नहीं किया जाए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, सक्षम अधिकारी से जारी वैध पारिवारिक सूची या वंशावली, खतियान की प्रति और अन्य उपलब्ध अभिलेख सत्यापन में उपयोग किए जा सकते हैं। यही दस्तावेज जाति और आवासीय प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में भी काम आते हैं, इसलिए अनावश्यक रूप से नए दस्तावेज बनवाने की जरूरत नहीं है।
साहिबगंज के एक सीएससी में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने इस विषय को गंभीरता से लिया है। बैठक में निर्देश दिया गया कि ऐसी अनियमितता दोबारा न हो। विदेशी नागरिक के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने, जमा कराने या इसमें सहयोग करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
सीएससी संचालकों को बताया गया कि केंद्रों की सेवाएं भारतीय नागरिकों के लिए हैं। उन्हें लोगों को सही प्रक्रिया की जानकारी देने और निर्धारित नियमों के अनुसार ही सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया। निर्वाचन संबंधी आंकड़ों में उम्र बदलने, अनधिकृत संशोधन करने या किसी तरह की छेड़छाड़ से भी स्पष्ट रूप से मना किया गया है।
सभी उप निर्वाचन पदाधिकारियों और सीएससी प्रबंधकों को इन निर्देशों की जानकारी प्रत्येक केंद्र तक तत्काल पहुंचाने तथा उनकी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है। अधिकारियों ने कहा कि फर्जी दस्तावेज से जुड़ा मामला मिलने पर संबंधित केंद्र की भूमिका की जांच होगी और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ प्रचलित नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।