झारखंड हाईकोर्ट ने निशार हसन की निवारक हिरासत में हस्तक्षेप से किया इनकार

अदालत ने जेसीसीए के तहत जारी निवारक हिरासत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि को पर्याप्त माना।

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रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर से जुड़े निशार हसन की निवारक हिरासत के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2002 के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली उसकी आपराधिक रिट याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने पर्याप्त संतुष्टि के बाद हिरासत का आदेश पारित किया था।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि उसके विरुद्ध दर्ज सभी छह आपराधिक मामलों में नियमित जमानत मिल चुकी है। इस आधार पर निवारक हिरासत के आदेश की वैधता पर सवाल उठाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में जमानत मिलना अपने-आप निवारक हिरासत के आदेश को अवैध नहीं बनाता।

पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने सात अक्टूबर 2025 को अधिनियम की धारा 12(1) और 12(2) के तहत हिरासत का प्रारंभिक आदेश जारी किया था। इसके बाद 19 दिसंबर 2025, 19 मार्च 2026 और 25 जून 2026 को हिरासत की अवधि तीन-तीन महीने के लिए बढ़ाई गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सरकार ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन आदेशों की पुष्टि भी की थी।

अदालत के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड में निशार हसन के खिलाफ छह आपराधिक मामले और दस सनहा दर्ज होने का उल्लेख किया गया। छह मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम से संबंधित आरोप बताए गए हैं। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने मामले को अधिनियम में परिभाषित असामाजिक तत्व की श्रेणी के अंतर्गत माना।

राज्य सरकार ने अदालत में दावा किया कि याचिकाकर्ता जेल में रहते हुए भी सहयोगियों के माध्यम से संगठित आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहा था। सरकार ने यह आशंका भी जताई कि जेल से बाहर आने पर उसकी गतिविधियों से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती है। ये बातें सरकार की ओर से पेश दावों और रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।

आदेश में बोडाम थाना कांड संख्या 39/2024 से जुड़े एक अन्य आरोप का भी उल्लेख है, जिसमें विदेश से गतिविधियां संचालित करने की बात कही गई थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक गृह मंत्रालय ने उसका वीजा रद्द कर लुकआउट सर्कुलर जारी किया था और 20 मई 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेजा गया था।