पलामू, गढ़वा और लातेहार में त्योहारी अवधि के दौरान चोरी, सेंधमारी और छिनतई की घटनाएं रोकने के लिए पुलिस ने विशेष कार्ययोजना लागू की है। दुर्गा पूजा से छठ तक चलने वाली इस व्यवस्था के तहत संवेदनशील इलाकों में निगरानी और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है। पुलिस के मुताबिक, नवरात्र के दौरान इन जिलों से चोरी या छिनतई की कोई घटना सामने नहीं आई है।
योजना के तहत लूट, चोरी और छिनतई के मामलों में पहले शामिल रहे लोगों की अलग-अलग सूची तैयार की गई है। जेल से बाहर आए अपराधियों को भी चिह्नित कर उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस उन इलाकों पर खास ध्यान दे रही है, जहां पर्व-त्योहार के समय संपत्ति से जुड़े अपराध पहले होते रहे हैं।
मेदिनीनगर में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए 60 उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे सक्रिय किए गए हैं। वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने वाला एएनपीआर कैमरा भी चालू किया गया है। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर पुलिस बल लगाया गया है, जबकि बस स्टैंड तथा रेलवे स्टेशन पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। इसके लिए पुलिस जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल के संपर्क में है।
पलामू के डीआईजी किशोर कौशल के अनुसार, त्योहारी दिनों में लोग बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकलते हैं और कई परिवार अपने पैतृक गांव जाते हैं। ऐसे समय खाली घरों की रेकी कर चोरी या सेंधमारी किए जाने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि तीनों जिलों के पुलिस अधीक्षकों को गश्त मजबूत करने और संपत्ति संबंधी अपराधों में शामिल लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पलामू में चोरी की 39 और घरों में सेंधमारी की 149 घटनाएं दर्ज हुई थीं। गढ़वा में चोरी के 10 तथा सेंधमारी के 64 मामले सामने आए थे। लातेहार में चोरी की 10 और सेंधमारी की 39 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें सबसे अधिक घटनाएं अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के दौरान रिकॉर्ड की गई थीं।
इन्हीं पुराने मामलों को ध्यान में रखकर शहरी क्षेत्रों, परिवहन केंद्रों और पहले से चिह्नित स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस की मौजूदा रणनीति निगरानी कैमरों, नियमित गश्त, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना जुटाने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर केंद्रित है।