दुर्गा-काली पूजा के लिए पर्यावरण दिशा-निर्देश जारी, प्रतिमा निर्माण से विसर्जन तक तय नियम

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पूजा समितियों, निकायों और प्रशासन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा, अलग-अलग कचरा संग्रह और सुरक्षित विसर्जन पर जोर है।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
दुर्गा-काली पूजा के लिए पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा और सुरक्षित विसर्जन संबंधी दिशा-निर्देश

रांची में दुर्गा पूजा और काली पूजा के दौरान जलस्रोतों तथा आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश पूजा समितियों के साथ स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन और आम नागरिकों पर भी लागू होंगे। इनमें प्रतिमा बनाने की सामग्री से लेकर पंडाल के कचरा प्रबंधन और विसर्जन तक की व्यवस्था बताई गई है।

पर्षद ने प्रतिमाओं के निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण अनुकूल सामग्री को प्राथमिकता देने को कहा है। पीओपी, थर्मोकोल और रेजिन फाइबर के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है। प्रतिमा में पानी में घुलने वाली गैर-विषैली सामग्री और सजावट में हल्दी तथा चंदन जैसे प्राकृतिक, जैव-अवक्रमणीय रंग अपनाने पर जोर दिया गया है।

पूजा पंडालों में जैविक, गैर-जैविक और अन्य पूजा अवशेष अलग रखने के लिए तीन डिब्बों की व्यवस्था करनी होगी। विसर्जन से पहले प्रतिमा पर लगे फूल, कपड़े और सजावटी सामान हटाने की जिम्मेदारी भी समितियों की होगी। आयोजनों में सिंगल यूज प्लास्टिक से बचते हुए पत्तल, पत्तों की प्लेट, जैव-अवक्रमणीय कागज के कप-प्लेट और मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, समितियों को स्थानीय निकाय में पंजीकृत या अधिकृत कारीगरों से पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाएं लेने की व्यवस्था करनी होगी। विसर्जन और कचरा प्रबंधन के लिए निकाय से जरूरी अनुमति तथा प्रबंधन योजना संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। जलस्रोत की स्थिति को देखते हुए प्रतिमाओं की ऊंचाई नियंत्रित करने की व्यवस्था भी की जा सकती है।

विसर्जन स्थल पर फूल, कपड़े या सजावट की बची सामग्री फेंकने और जलाने पर रोक रहेगी। प्रतिमा विसर्जित होने के बाद शेष सामग्री को स्थानीय निकायों को 24 घंटे के भीतर हटाकर उचित तरीके से निपटाना होगा। पूजा समितियों को पोस्टर और पर्चों के जरिये श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का निर्देश भी दिया गया है।

नियम केवल बड़े पंडालों तक सीमित नहीं हैं। घरों में प्रतिमा स्थापित करने वाले लोग घर पर पर्यावरण अनुकूल तरीके से विसर्जन कर सकते हैं या स्थानीय निकाय के कृत्रिम तालाब और टैंक का उपयोग कर सकते हैं। पूजा सामग्री को पॉलीथिन में बांधकर नदी अथवा दूसरे जलस्रोत में नहीं डालने की सलाह दी गई है।