देवघर में रविवार को क्लिनिकल कार्डियो डायबिटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया का 10वां राष्ट्रीय सम्मेलन ‘CCDSICON 2026’ आयोजित किया गया। सम्मेलन में वरिष्ठ चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों ने मरीजों की बीमारी समझने में शारीरिक परीक्षण, डॉक्टर के अनुभव तथा आवश्यक जांच के बीच संतुलन पर विचार साझा किए। आयोजकों के अनुसार, देवघर में इस तरह का चिकित्सा सम्मेलन पहली बार हुआ।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इलाज की प्रक्रिया शुरू करने से पहले डॉक्टर को मरीज के शारीरिक लक्षणों का बारीकी से आकलन करना चाहिए। आंख, जीभ, बालों का रंग, त्वचा की बनावट, हृदय की आवाज और लीवर की स्थिति जैसे संकेत बीमारी को समझने में मदद कर सकते हैं। इसके बाद मरीज की जरूरत के अनुसार जांच और आगे के उपचार की दिशा तय की जानी चाहिए।
भागलपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हेमशंकर शर्मा ने सम्मेलन में कहा कि मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था में कई बार इलाज की शुरुआत जांचों को प्राथमिकता देने से होती है। उन्होंने मरीज की परेशानी समझने के लिए चिकित्सकीय अनुभव और प्रत्यक्ष परीक्षण की भूमिका पर जोर दिया। उनके मुताबिक, मरीज के साथ सहानुभूतिपूर्ण संवाद से जरूरी जांच का चयन अधिक स्पष्ट हो सकता है।
सम्मेलन में मेडिकल विद्यार्थियों को भी वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुभव जानने का अवसर मिला। कार्यक्रम में शामिल छात्रा शीतल ने बताया कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी के चिकित्सकों को अनुभवी डॉक्टरों से मिलने और उनकी कार्यप्रणाली समझने में मदद मिलती है। चर्चा का केंद्र तकनीक के साथ बुनियादी क्लिनिकल कौशल को महत्व देना रहा।
कार्यक्रम के संचालक डॉ. डी. तिवारी ने कहा कि भविष्य में भी देवघर में इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे। इसका उद्देश्य संताल परगना और आसपास के जिलों के डॉक्टरों को चिकित्सा क्षेत्र की नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराना है। सम्मेलन में मरीज को समझने, लक्षणों का परीक्षण करने और उसके बाद आवश्यक चिकित्सकीय जांच चुनने की क्रमबद्ध प्रक्रिया पर विशेष जोर रहा।