धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नेत्र विभाग की स्नातकोत्तर पढ़ाई शुरू करने और चार पीजी सीटों की मान्यता हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। नेशनल मेडिकल कमीशन के प्रतिनिधि एम. बाबू ने विभाग का निरीक्षण कर उपलब्ध सुविधाओं तथा मानव संसाधन का भौतिक सत्यापन किया। अंतिम निर्णय एनएमसी की रिपोर्ट और मंजूरी पर निर्भर करेगा।
निरीक्षण के दौरान नेत्र विभाग के आउटडोर, इनडोर और ऑपरेशन थिएटर का जायजा लिया गया। चिकित्सकों की उपलब्धता, विभाग में मौजूद उपकरणों और शल्य चिकित्सा से जुड़े स्थानों की भी जांच की गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार निरीक्षण की रिपोर्ट एनएमसी को भेजी जाएगी। मानक पूरे पाए जाने और अनुमति मिलने के बाद ही पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने का रास्ता साफ होगा।
अस्पताल अधीक्षक डीके गिंदोरिया के मुताबिक फिलहाल केवल नेत्र विभाग का निरीक्षण हुआ है। कॉलेज ने पहले इस विभाग में दो पीजी सीटों के लिए आवेदन किया था। बाद में फैकल्टी और बुनियादी ढांचे में वृद्धि को आधार बनाते हुए चार सीटों की मान्यता देने का आग्रह किया गया। अन्य विभागों में सीटों के विस्तार के लिए अलग निरीक्षण होने हैं।
नेत्र विभाग को उन्नत बनाने के क्रम में लंबे समय से निष्क्रिय रेटिना और ग्लूकोमा संबंधी मशीनों को दोबारा चालू कराया गया है। आई बैंक का पांच वर्षों से लंबित लाइसेंस भी नवीनीकृत किया गया। अस्पताल में पिछले वर्ष कॉर्निया दान की शुरुआत हुई थी। चिकित्सक का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अब केराटोप्लास्टी यानी कॉर्निया प्रत्यारोपण शुरू करने की तैयारी चल रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने फेको मशीन की खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में होने की जानकारी दी है। प्रबंधन को उम्मीद है कि करीब दो महीने में केराटोप्लास्टी और फेको सर्जरी की सुविधाएं शुरू हो सकती हैं। हालांकि, इन सेवाओं की शुरुआत तैयारी और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही होगी। सामान्य मोतियाबिंद की सर्जरी अस्पताल में पहले से उपलब्ध है।
नेत्र विभाग के प्रमुख डॉ. धर्मेंद्र कुमार के अनुसार फेको एमल्सीफिकेशन और कॉर्निया प्रत्यारोपण उपलब्ध होने से पात्र मरीजों को निर्धारित व्यवस्था के तहत कम खर्च में उपचार मिल सकेगा। फिलहाल कॉलेज प्रशासन को एनएमसी की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के बाद ही चार पीजी सीटों की मान्यता और पाठ्यक्रम शुरू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।