धनबाद के हीरापुर स्थित झारखंड मैदान में इस वर्ष दुर्गा पूजा के लिए करीब 32 लाख रुपये की लागत से इको-फ्रेंडली पंडाल तैयार किया गया है। शीश महल की थीम पर बने इस पंडाल में अंडमान-निकोबार की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को कलात्मक रूप में प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है।
पंडाल की संरचना और सजावट में बांस, बांस की चटाई, होगला पत्ता, जूट, नारियल के छिलके तथा अलग-अलग प्रकार के प्राकृतिक पत्तों का इस्तेमाल किया गया है। कारीगरों ने इन सामग्रियों को हाथ से आकार देकर सजावटी कलाकृतियां बनाई हैं, जो पूरे परिसर को विशिष्ट स्वरूप देती हैं।
आयोजकों ने भव्य सजावट के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। प्राकृतिक वस्तुओं से तैयार की गई यह संरचना त्योहारों में प्लास्टिक और प्रदूषण बढ़ाने वाली सामग्रियों पर निर्भरता कम करने की संभावना को सामने रखती है।
पंडाल के विभिन्न हिस्सों में अंडमान-निकोबार के आदिवासी समुदायों की परंपराओं और रहन-सहन की झलक प्रस्तुत की गई है। इसके जरिए पूजा देखने आने वाले लोगों को एक अलग क्षेत्र की संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।
शीश महल की केंद्रीय थीम को पारंपरिक शिल्प और प्राकृतिक सजावट के साथ जोड़ा गया है। इस संयोजन में आस्था, कला और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को एक ही आयोजन में समाहित करने की कोशिश दिखाई देती है। बारीक हस्तकला और प्राकृतिक सामग्री पंडाल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
झारखंड मैदान का यह पंडाल इस बार धनबाद के दुर्गा पूजा आयोजनों में खास आकर्षण के रूप में सामने आया है। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के साथ पंडाल की कलाकारी और अंडमान-निकोबार की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी देख सकेंगे।